९० लाख की कथित ठगी से हिला वारासिवनी
वारासिवनी के युवक ने खोई जमा पूंजी, प्लॉट बेचा,जेवर गिरवी रखे
एफआईआर की मांग लेकर थाने पहुंचा पीडि़त , कहा मैं भी इस खेल का पहला शिकार हूँ
पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। जिले में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित रूप से लाखों करोड़ों रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। वारासिवनी निवासी ब्रजकिशोर ठाकरे ने लालबर्रा अमोली निवासी सुमित वृषिक के विरुद्ध पुलिस थाना वारासिवनी में लिखित शिकायत प्रस्तुत कर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में बताया कि सरकारी एवं आउटसोर्स नौकरियों में नियुक्ति दिलाने का झांसा देकर वर्षों तक बेरोजगार युवाओं और उनके परिवारों से बड़ी रकम वसूली गई। लेकिन अधिकांश मामलों में ना तो नौकरी मिली और ना ही राशि वापस की गई।
मैं आरोपी नही सबसे पहला पीडि़त हूँ
शिकायतकर्ता ब्रजकिशोर ठाकरे ने बताया कि वह स्वयं इस पूरे प्रकरण का सबसे पहले शिकार बना। सहारा इंडिया में ऑडिटर के रूप में कार्यरत रहने के दौरान सेबी की कार्यवाही के बाद उसकी नौकरी चली गई थी। आर्थिक संकट के इसी दौर में उसकी मुलाकात सुमित वृषिक से हुई जिसने बड़े अधिकारियों और नेताओं से संपर्क होने का दावा करते हुए विभिन्न विभागों में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। शिकायत के अनुसार पहले स्वयं ब्रजकिशोर से विभिन्न नौकरियों के नाम पर रकम ली गई। कुछ लोगों को आउटसोर्स पदों पर कार्य मिलने से उसका विश्वास और बढ़ा। इसके बाद उसने अपने परिचित बेरोजगार युवाओं की फाइलें भी उसके पास भेजना शुरू कर दीं।
पहले जीता लोगों का भरोसा फिर टूटे सपने
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए। वेरिफिकेशन और चयन की प्रक्रिया बताई गई, लेकिन समय बीतने के बाद अधिकांश नियुक्तियां नहीं हुईं। जब लोगों ने पैसा वापस मांगना शुरू किया तो कथित रूप से बहानेबाजी और टालमटोल का दौर शुरू हो गया। कई मामलों में कथित नियुक्ति पत्रों की सत्यता पर भी सवाल खड़े हुए।
लोगों को लौटाने पड़े ४० लाख रुपये
ब्रजकिशोर ठाकरे ने बताया कि जिन लोगों ने उसके माध्यम से राशि जमा की थी। उन्होंने पैसा वापस मांगने के लिए मुझ पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने और लोगों का विश्वास कायम रखने के लिए उसने अपनी माता की जमा पूंजी, परिवार के जेवर और निजी संपत्ति तक बेच दी। उसकी बहन ने भी ऋ ण लेकर मदद की लगभग ४० लाख रुपये लोगों को अपनी ओर से लौटाए जा चुके हैं।
९० लाख रुपये तक का किया लेन देन
ब्रजकिशोर ने बताया कि बैंक स्टेटमेंट, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध हैं। उसके तथा अन्य लोगों के माध्यम से आरोपी तक ९० लाख रुपये की राशि पहुंची। बृजकिशोर ने सभी वित्तीय लेन देन की जांच की मांग की है।
जान से मारने का भी आरोप
ब्रजकिशोर ठाकरे ने आरोप लगाया है कि जब उसने अपनी और अन्य लोगों की राशि वापस मांगनी शुरू की तो उसें कथित रूप से जान से मारने की धमकियां दी गईं। उसे यह कहा कि जो करना है कर लो, मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा। इस कारण उसका परिवार मानसिक तनाव और भय के वातावरण में जीवन व्यतीत कर रहा है।
प्रशासन से बड़ी कार्यवाही की मांग
पीडि़त ने पुलिस से मांग की है कि मामले में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और कथित नियुक्ति दस्तावेजों की गहन जांच कर एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि कथित रूप से प्राप्त धनराशि का उपयोग कहां और किस प्रकार किया गया।
इनका कहना है
इस मामले में जब थाना प्रभारी से चर्चा की गई तो उन्होने कहा कि ये मामला मेरे संज्ञान में है। जिसमें जांच प्रारंभ की जायेगी।










































