‘नौकरी जाने का डर सताया’, ₹80,000 से शुरुआत, आज ₹3 करोड़ की कंपनी, रवीना टंडन भी मुरीद

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नई दिल्‍ली: यह कहानी ऐसी दो बहुओं की है, जिन्‍होंने परिवार की पुरानी गौशाला को सफल कारोबार में तब्‍दील कर दिया। इनके नाम तान्‍या और सौम्‍या हैं। 2007 में बंसल परिवार ने इस गौशाला की शुरुआत की थी। यह गौशाला एक दशक तक बिना प्रॉफिट चलती रही। लेकिन, 2020 में महामारी के दौरान जब कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ी तब तान्या और सौम्या ने नेतृत्व संभाला। सिर्फ 80,000 रुपये की शुरुआती बचत से उन्होंने बिना किसी केमिकल और मशीन के ‘पंचगव्य दीये’ और पारंपरिक बिलोना घी बनाने की शुरुआत की। आज ‘कान्हा गौशाला’ 55 से अधिक उत्पाद बनाकर देशभर में अपनी खास पहचान बना चुकी है। इसकी मुरीद भारती सिंह, रवीना टंडन और अनुपम खेर जैसी मशहूर हस्तियां भी हैं।

साल 2007 में झांसी के बिजनेसमैन राजेश बंसल और सुधा बंसल ने देसी गायों की रक्षा और सेवा के उद्देश्य से कान्हा गौशाला की स्थापना की थी। 5 गायों के साथ यह गौशाला शुरू हुई थी। करीब एक दशक तक यह पूरी तरह से बिना किसी प्रॉफिट के चलती रही। परिवार अपनी जेब से हर महीने लगभग 6 लाख रुपये खर्च करता था। स्थानीय स्तर पर दूध बेचकर केवल 1 लाख रुपये की आय होती थी। इसके बावजूद उन्होंने कभी कोई डोनेशन नहीं लिया। हालांकि, साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान जब गौशाला में काम करने वाले 22 कर्मचारियों के रोजगार पर संकट आया तब बंसल परिवार ने कर्मचारियों की आजीविका बचाने और गौशाला को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के लिए इसे एक कमर्शियल और सस्टेनेबल मॉडल में बदलने का फैसला किया।

गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की कमान परिवार की दो बहुओं- तान्या बंसल और सौम्या गुप्ता ने संभाली। तान्‍या बंसल ने एक इंटरव्‍यू में कहा, ‘2020 में जब हमारे स्टाफ को नौकरी जाने का डर सताने लगा तब हमने इसे व्यावसायिक मोड़ दिया ताकि एक टिकाऊ मॉडल बन सके।’ दोनों बहुओं ने मिलकर सिर्फ 80,000 रुपये के शुरुआती निवेश से काम शुरू किया। इसमें से आधी रकम सौम्या के राखी के लिफाफों और आधी तान्या की बचत से आई थी। उन्होंने अमेजन से मैन्युअल दीया बनाने की 4 मशीनें खरीदीं। 50 से अधिक ट्रायल्स के बाद ‘पंचगव्य दीया’ तैयार किया। सितंबर 2020 में लॉन्च हुए इन दीयों की बिक्री से कंपनी को बड़ा प्रोत्साहन मिला। ऋतिक रोशन की मां पिंकी रोशन ने खुद फोन करके ये दीये खरीदे। इसके बाद दिवाली सीजन में सिर्फ पंचगव्य दीये बेचकर कंपनी ने दो महीने में 10 लाख रुपये का रेवेन्‍यू जुटाया। इसने उनके बिजनेस मॉडल पर मुहर लगा दी।

नवंबर 2020 के बाद गौशाला ने कच्चा दूध बेचना बंद कर दिया। अपना पूरा फोकस पारंपरिक बिलोना घी बनाने पर किया। बिना किसी मशीनरी के सिर्फ हाथों से पारंपरिक बिलोना पद्धति से घी तैयार किया जाने लगा। धीरे-धीरे ब्रांड ने अपने पोर्टफोलियो में सिलबट्टे पर पिसे मसाले, मखाना, मोरिंगा पाउडर, भीमसेनी कपूर और शहद जैसे 55 से अधिक उत्पाद शामिल कर लिए। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि सभी उत्पाद गौशाला के अंदर ही तैयार होते हैं। इनमें किसी भी तरह के प्रिजर्वेटिव या केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता। बिना किसी वेबसाइट के सिर्फ इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के जरिए ऑर्डर लेकर ये उत्पाद आज पूरे देश में डिलीवर किए जाते हैं।

आज ‘कान्हा गौशाला’ 22 एकड़ में फैली हुई है। यहां 375 से अधिक गायों की देखभाल 16 कर्मचारी करते हैं। गायों के चारे से लेकर प्राकृतिक गर्भाधान और जीवनभर देखभाल के सख्त नैतिक नियमों का पालन किया जाता है। बछड़े का दूध पर पहला अधिकार होता है। किसी भी गाय को कभी छोड़ा नहीं जाता। 60 लोगों की टीम और हर महीने 1,600 से अधिक ग्राहकों के भरोसे के साथ कान्हा गौशाला आज 28 लाख रुपये महीने यानी सालाना लगभग 3 करोड़ रुपये का रेवेन्‍यू हासिल कर रही है। तान्या और सौम्या का टारगेट 2026 में ऑफलाइन एग्‍ज‍िबिशन के जरिए विस्तार करना और अगले 5 सालों में कम से कम 3 प्रोडक्‍ट्स में मार्केट लीडर बनना है।

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