मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में अवैध खनन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान खनिज अधिकारी के तीसरे बच्चे का मामला सामने आया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया कि यदि नियुक्ति के समय दो बच्चों की शर्त है, तो नौकरी के बाद तीसरा बच्चा होने पर क्या नियम प्रभावी नहीं रहता?ग्वालियर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में प्रशासनिक सेवा नियमों और पारिवारिक नियोजन से जुड़े एक अहम मामले पर तीखी सुनवाई हुई है। अवैध खनन से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने ग्वालियर में पदस्थ खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा के तीन बच्चों का मामला उठा। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से सीधा सवाल किया कि यदि नियुक्ति के समय दो बच्चों की शर्त लागू होती है, तो नौकरी मिलने के बाद तीसरा बच्चा होने पर क्या यह नियम प्रभावी नहीं रहेगा?
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: नियम का उद्देश्य हो जाएगा विफल
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सेवा नियमों के अनुसार सरकारी नौकरी के किसी भी अभ्यर्थी के दो से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए। इस पर खंडपीठ ने सवाल उठाया कि क्या यह शर्त केवल प्रवेश या नियुक्ति के समय तक ही सीमित है या सेवा में आने के बाद भी कर्मचारी पर लागू रहती है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि नौकरी मिलने के बाद तीसरा बच्चा होने पर नियम का कोई असर नहीं पड़ता, तो दो बच्चों की सीमा तय करने का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।अशोक यादव की खदानों पर रोक जारी
सरकारी वकील इस महत्वपूर्ण सवाल पर तत्काल कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके और कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अदालत ने राज्य सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हुए दो सप्ताह के भीतर नियम की स्पष्ट व्याख्या पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, संबंधित खनिज अधिकारी को भी इस मामले में अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया गया है। इसी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अवैध खनन से जुड़े मामले में अशोक यादव की तीन खदानों पर लगी रोक को अगले आदेश तक बरकरार रखा है और पिछले पांच वर्षों में अवैध खनन के मामलों में दर्ज एफआईआर का पूरा रिकॉर्ड भी तलब कर लिया है।










































