E20 Petrol Controversy Explained : देश में इस समय E20 पेट्रोल को लेकर काफी बहस और चर्चा चल रही है। क्योंकि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया (ethanol blending) जा रहा है। हाल के दिनों में आए कुछ सर्वे और सरकारी बयानों के बाद यह मुद्दा और ज्यादा गरमा गया है। गाड़ी मालिकों का कहना है कि इससे उनकी गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है और परफॉर्मेंस पर असर पड़ रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि यह कदम ईंधन आत्मनिर्भरता और प्रदूषण कम करने के लिए जरूरी है। भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की पॉलिसी सरकार द्वारा ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है। एथनॉल एक जैव-ईंधन (biofuel) है, जिसे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।
E20 पेट्रोल पर हंगामा क्यों बरपा?
इस विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि अब कई पेट्रोल पंपों पर सिर्फ E20 पेट्रोल ही मिल रहा है। ग्राहकों के पास बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल चुनने का विकल्प नहीं है। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जिनकी गाड़ियां 2023 से पहले बनी हैं। ऐसी गाड़ियां E20 ईंधन के हिसाब से पूरी तरह डिजाइन नहीं की गई थीं। इसी वजह से कई वाहन मालिक इस बदलाव से नाराज हैं।
E20 पेट्रोल क्या है, क्यों मिलाया जा रहा है इथेनॉल?
E20 पेट्रोल एक मिश्रित ईंधन है। इसमें 80% सामान्य पेट्रोल और 20% एथेनॉल होता है। एथेनॉल एक जैव ईंधन है। इसे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसका उद्देश्य पेट्रोल की खपत कम करना है। साथ ही देश को ईंधन के मामले में आत्मनिर्भर बनाना भी इसका लक्ष्य है। इसे पेट्रोल के साथ मिलाकर उपयोग करने से कच्चे तेल (crude oil) का आयात घटता है और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है। सरकार का लक्ष्य E20 (20% एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) को देशभर में लागू करना है।









































