बच्चों की मौत के मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पहुंचे बिरसा, पीड़ित परिवारों से मिलकर सरकार से मांगी जवाबदेही,

0

बैगा आदिवासी क्षेत्रों का दौरा कर जानी जमीनी हकीकत, मृत बच्चों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की उठाई मांग

बिरसा क्षेत्र के बैगा आदिवासी बाहुल्य गांवों में बच्चों की लगातार हो रही मौत का मामला अब राजनीतिक रूप से और अधिक गंभीर होता जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार को घेर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की जा चुकी है। वहीं, 14 अगस्त को मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार बालाघाट पहुंचे और प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बैहर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुंडेकसा, अडोरी, कोरका और बोंदारी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने उन परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने महामारी के दौरान अपने मासूम बच्चों को खो दिया है। उन्होंने मृत बच्चों के माता-पिता के साथ बैठकर उनका दुख साझा किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। दौरे के दौरान उमंग सिंघार ने बैगा आदिवासी परिवारों के रहन-सहन, स्वास्थ्य सुविधाओं, पेयजल व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने आदिवासी समुदाय के लोगों से सीधे चर्चा कर यह जानने का प्रयास किया कि आखिर इन क्षेत्रों में आज भी बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंच पाई हैं। नेता प्रतिपक्ष ने अस्पताल में भर्ती बच्चों का भी हालचाल जाना और उनके स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार को इस पूरे मामले में संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। बच्चों की मौत जैसी घटनाएं बेहद दुखद हैं और ऐसे मामलों में प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता मिलनी चाहिए। उन्होंने मृत बच्चों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को तत्काल राहत प्रदान करनी चाहिए। उमंग सिंघार ने बैगा आदिवासी क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर सरकार पर कई सवाल भी खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि समय पर स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छ पेयजल और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई होतीं तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं बैहर विधायक संजय उइके, परसवाड़ा विधायक मधु भगत, वारासिवनी विधायक विवेक विक्की पटेल, पूर्व सांसद विश्वेश्वर भगत, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष हिना कावरे, पूर्व अनुसूचित जनजाति आयोग सदस्य हीरासन बाई उइके, जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राट अशोक सिंह सरस्वार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

मानव अधिकार आयोग ने कलेक्टर और सीएमएचओ को किया तलब

दूसरी ओर, इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग भी सक्रिय हो गया है। मानव अधिकार आयोग की सदस्य फिरोज खान ने बताया कि आयोग ने इस मामले में जिला कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से जवाब तलब किया है। उन्होंने बताया कि मानव अधिकार आयोग की ओर से 29 जुलाई और 12 अगस्त को इस मामले को लेकर पत्र जारी किए गए हैं। आयोग ने समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के आधार पर बच्चों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए संज्ञान लिया है। मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने प्रथम दृष्टया मानव अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। आयोग के अनुसार, बिरसा विकासखंड की ग्राम पंचायत अडोरी के अंतर्गत आने वाले बोंदारी और कुंडेकसा गांवों में बच्चों के बीच एक संदिग्ध संक्रामक बीमारी फैलने के कारण चार बच्चों की मौत और 16 से अधिक बच्चों के बीमार होने की जानकारी सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बालाघाट को जांच कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। बच्चों की मौत के मामले में अब राजनीतिक दबाव के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही भी बढ़ती जा रही है। एक ओर कांग्रेस इस मुद्दे को प्रदेश स्तर पर उठा रही है, तो दूसरी ओर मानव अधिकार आयोग की सक्रियता के बाद प्रशासन पर भी जल्द तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत करने का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में अब सभी की निगा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here