5 सितंबर को आंबेडकर चौक में होगा प्रदर्शन; 18 ट्रायबल राज्यों के प्रतिनिधी होंगे शामिल
3 सितंबर के बालाघाट बंद को भी पूरा समर्थन
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पदमेश न्यूज़। बालाघाट।बैहर-बिरसा क्षेत्र में बैगा आदिवासी बच्चों की मौत का मामला अब स्थानीय आंदोलन से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी है। आदिवासी समाज संगठन ने मृत बैगा बच्चों को न्याय दिलाने और प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों की बदहाल स्वास्थ्य एवं मूलभूत सुविधाओं को लेकर 5 सितंबर को नगर के आंबेडकर चौक में राष्ट्रीय महाधरना प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है।उक्त जानकारी सर्व आदिवासी समाज संगठन के अध्यक्ष भुवनसिंह कोर्राम ने 1 सितंबर मंगलवार देर शाम आयोजित एक पत्रकारवार्ता के दौरान दी।उन्होंने दावा किया कि इस राष्ट्रीय महाधरने में देश के करीब 18 ट्रायबल राज्यों के आदिवासी संगठनों के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि शामिल होंगे। आंदोलन के दौरान प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के साथ मृत बच्चों के परिवारों को न्याय और आर्थिक सहायता देने की मांग की जाएगी।
दिल्ली में हुई बैठक में उठा बैगा बच्चों की मौत का मुद्दा
भुवनसिंह कोर्राम ने बताया कि गत दिनों दिल्ली में राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति की कोर कमेटी की बैठक आयोजित हुई थी। यह समिति आदिवासी समाज से जुड़े राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर संघर्ष करती है।उन्होंने कहा कि बैठक में बालाघाट के बैहर क्षेत्र में हुई बैगा आदिवासी बच्चों की मौतों के मामले पर भी गंभीरता से चर्चा हुई। संगठन का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में विशेष रूप से संरक्षित जनजाति के बच्चों की मौत का मामला केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय है।उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाने और केंद्र तथा राज्य सरकार के समक्ष जवाबदेही तय करने की मांग रखी जाएगी।
3 सितंबर के बालाघाट बंद को पूरा समर्थन
अध्यक्ष भुवनसिंह कोर्राम ने बताया कि 3 सितंबर को बालाघाट बंद के आह्वान को आदिवासी संगठन का पूरा समर्थन है। उन्होंने कहा कि बैगा बच्चों की मौत के मामले में पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए तथा मौतों के लिए यदि किसी अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत को लेकर समाज में आक्रोश है और इसी आक्रोश को लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन के माध्यम से प्रशासन और सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
80 साल बाद भी बैगा अंचल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव
अध्यक्ष भुवनसिंह कोर्राम ने कहा कि आजादी के 80 साल बाद भी आदिवासी क्षेत्रों में लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि आदिवासी क्षेत्रों के विकास के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन इसका अपेक्षित लाभ धरातल पर नजर नहीं आता।उन्होंने विशेष रूप से स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में आज भी ग्रामीणों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार कई बैगा परिवार आज भी झिरिया के पानी पर निर्भर हैं।उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और आंगनबाड़ी सुविधाओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कई क्षेत्रों में पर्याप्त शैक्षणिक एवं बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं है।
“बैगा विशेष रूप से संरक्षित जनजाति, फिर भी हालात चिंताजनक”
भुवनसिंह कोर्राम ने कहा कि बैगा जनजाति विशेष रूप से संरक्षित जनजातीय समूह में शामिल है। ऐसे समुदाय के लोगों तक शासन की योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।उन्होंने आरोप लगाया कि बैगा जनजाति के विकास के लिए मिलने वाली राशि का उपयोग अपेक्षित तरीके से नहीं हो रहा है। संगठन अब इस बात की जांच की मांग करेगा कि आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए प्राप्त करोड़ों रुपये की राशि कहां खर्च हुई और उसका धरातल पर कितना लाभ पहुंचा।
शीतकालीन सत्र में उठेगा मामला
आदिवासी संगठन ने बैगा बच्चों की मौत के मामले को संसद के शीतकालीन सत्र में भी उठाने की तैयारी की है। भुवनसिंह कोर्राम ने कहा कि सांसदों के माध्यम से बैगा क्षेत्रों की स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और विकास योजनाओं से जुड़े मुद्दे संसद में उठाए जाएंगे।संगठन यह भी मांग करेगा कि आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए मिली राशि के उपयोग की जांच हो और यह पता लगाया जाए कि योजनाओं का वास्तविक लाभ व…










































