मास्को: भारतीय वर्कर दशकों से पैसा कमाने के लिए लाखों की तादाद में खाड़ी देश जाते रहे हैं। यूएई, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, बहरीन जैसे देश मेहनतकश भारतीय वर्कर्स का लोहा मानते हैं। अब भारत के दोस्त रूस ने भी भारतीय वर्कर्स के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। असल में यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस में मजदूरों और कुशल कामगारों की भारी कमी हो गई है। रूस पहले पूर्व सोवियत संघ के देशों के वर्कर्स को अपने यहां आने का मौका देता था लेकिन वहां हुए आतंकी हमलों के बाद अब उसने अपनी रणनीति बदल दी है। रूस ने भारतीयों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। रूस ने अब ताजा जानकारी दी है कि भारतीय वर्कर्स की संख्या बढ़कर 70 हजार तक पहुंच गई है।
रूस ने कहा है कि दिल्ली और मास्को के बीच मजदूरों को लेकर सहयोग काफी बढ़ रहा है। रूसी समाचार एजेंसी तास की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय मजदूरों की रूस में विभिन्न उद्योगों में भारी मांग है। भारत में रूस के कार्यवाहक राजदूत रोमन बाबूश्किन ने एक मजदूरों को लेकर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि भारतीय मजदूरों की खेती, कंस्ट्रक्शन, हाउसिंग और पब्लिक यूटिलिटी, खनन, तेल और गैस, रेल ट्रांसपोर्ट, जहाज निर्माण, कपड़ा उद्योग, फार्मासूटिकल, हेल्थकेयर, सूचना प्रौद्योगिकी और सेवाओं में भारी डिमांड है।









































