माले/नई दिल्ली: मालवीद के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने कहा है कि उनका देश ‘दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ’ (SAARC) की बातचीत को फिर से शुरू करने में मध्यस्थता करने के लिए तैयार है। राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा कि मालदीव कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों का सदस्य है जिनमें SAARC भी शामिल है। SAARC की स्थापना मालदीव सहित सात संस्थापक देशों की पहल से हुई थी। उन्होंने कहा कि SAARC ने दक्षिण एशिया को काफी फायदा पहुंचाया है लेकिन संगठन की गतिविधियां लगभग नौ वर्षों से ठप पड़ी हैं।
मालदीव के राष्ट्रपति अकेले नहीं हैं जो सार्क को फिर से जिंदा करने की मांग कर रहे हैं बल्कि बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद लगातार सार्क को फिर एक्टिव करने की मांग हो रही है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार हो या मौजूदा प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार दोनों ने कहा है कि सार्क का फिर से एक्टिव होना चाहिए। लेकिन भारत इन मांगों पर भाव नहीं दे रहा है। नेपाल भी सार्क को जिंदा करने की वकालत कर चुका है।
पाकिस्तान क्यों SAARC को जिंदा करना चाहता?
पाकिस्तान बहुत बेकरारी के साथ सार्क को जिंदा करना चाहता है। जियो पॉलिटिकल एक्सपुर्ट हैप्पीमोन जैकब ने तर्क दिया कि SAARC के पुनर्जीवित होने से दिल्ली को ‘मजबूती’ मिलेगी। लेकिन असल में SAARC पाकिस्तान को सशक्त बनाएगा। पाकिस्तान भारत के बराबर का दर्जा चाहता है और भारत पाकिस्तान को किसी भी तरह से राहत देने के मूड में नहीं है।
लेकिन चाहे वो मोहम्मद यूनुस हों या तारिक रहमान या फिर मोहम्मद मुइज्जू ये सभी वो लोग हैं जिनकी विचारधारा पाकिस्तान से मिलती है। असीम मुनीर ने भारत को ‘स्थायी दुश्मन’ कहा है तो फिर भारत असीम मुनीर को कोई रियायत क्यों दे? हैप्पीमोन जैकब तर्क देते हैं कि ‘नई दिल्ली के सामने पड़ोस को लेकर दो खास उलझनें हैं। एक तो यह कि वह इस इलाके में जितना ज्यादा जुड़ती है वहां के लोग उससे उतनी ही ज्यादा नाराजगी दिखाते हैं चाहे यह नाराज़गी सही हो या गलत और दूसरी बात यह कि वह जितना ज्यादा इस इलाके से पीछे हटती है उसे उतना ही ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है।’









































