नई दिल्ली: देश में फॉर्मल क्रेडिट तक लोगों की पहुंच पिछले नौ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। फॉर्मल क्रेडिट का मतलब है बैंक, क्रेडिट यूनियन और कोऑपरेटिव सोसाइटी जैसी रेगुलेटेड संस्थाओं से मिलने वाला लोन। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में कर्ज लेने वालों की संख्या पारंपरिक रूप से मजबूत माने जाने वाले पश्चिम और दक्षिण भारत के राज्यों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी है। इस दौरान महिलाओं, युवाओं और नॉन-मेट्रो क्षेत्रों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।
जानीमानी क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट ‘अनलॉकिंग एक्सेस: जर्नी टू क्रेडिट एक्सपैंशन इन इंडिया’ के मुताबिक देश में क्रेडिट-एलिजिबल पॉपुलेशन की संख्या 2017 में 79 करोड़ से बढ़कर 2026 में 89 करोड़ हो गई। इनमें कम से कम एक बार औपचारिक कर्ज लेने वाले लोगों की हिस्सेदारी 35% से बढ़कर 74% पहुंच गई। यह देश में औपचारिक वित्तीय व्यवस्था तक लोगों की बढ़ती पहुंच को दिखाता है।









































