व्हाट्सएप ग्रुप में भेजी पीडीएफ खोलते ही खाली हुए बैंक खाते

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प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर साइबर ठगी,तीन.चार लोगों से हजारों रुपये की राशि पार

पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। खैरलांजी थाना क्षेत्र के ग्राम किन्ही एवं खैरलांजी में सोशल मीडिया के माध्यम से साइबर ठगी का मामला सामने आया है। १५ सितंबर को ग्रामीणों के व्हाट्सएप ग्रुप में अज्ञात मोबाइल नंबर से प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित बताई जा रही एक पीडीएफ भेजी गई। ग्रामीण आवास योजना से संबंधित जानकारी समझकर जैसे ही कुछ लोगों ने पीडीएफ को खोलने का प्रयास किया। उनके मोबाइल में संदिग्ध प्रक्रिया शुरू हो गई और ओटीपी आने के बाद बैंक खातों से हजारों रुपये की राशि निकल गई। इस घटना में तीन से चार मोबाइल धारकों को आर्थिक नुकसान होने की जानकारी सामने आई है।

पीडीएफ खोलते ही हुई संदिग्ध गतिविधि

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम किन्ही के ग्रामीण व्हाट्सएप ग्रुप में अज्ञात नंबर से प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम से एक पीडीएफ कंटेंट भेजा गया था। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित सूची या जानकारी होने की संभावना के चलते ग्रुप में जुड़े कुछ युवकों ने उक्त पीडीएफ को देखने के लिए टच किया। बताया जा रहा है कि इसके बाद एक फॉर्म अथवा लिंक खुला और मोबाइल में संदिग्ध गतिविधि होने लगी। कुछ ही समय बाद संबंधित मोबाइल नंबर पर ओटीपी आया और ओटीपी की प्रक्रिया के बाद उनके बैंक खातों से राशि कट गई। पीडितों को घटना का पता उन्हें बैंक खाते से राशि कटने के बाद चला। इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी खैरलांजी पुलिस को दी तथा ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए शासन द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर १९३० पर भी संपर्क करने का प्रयास किया। हालांकि पीडितों का कहना है कि समय अधिक बीत जाने के कारण उनकी शिकायत दर्ज नहीं हो सकी।

किसी से ४७०० तो किसी के खाते से २५ हजार रुपये निकले

साइबर ठगी की इस घटना में विक्की बिसेन के खाते से करीब ४७०० रुपए, आदर्श माहुले के खाते से करीब २२ हजार रुपए तथा पंकज लिल्हारे के खाते से करीब २५ हजार रुपए की राशि निकलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा अन्य लोगों के साथ भी हजारों रुपए की ऑनलाइन ठगी होने की बात कही जा रही है। पीडि़तों ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध कार्यवाही करने तथा ठगी गई राशि वापस दिलाने की मांग की है। वर्तमान समय में सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यम लोगों की दैनिक जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। व्हाट्सएप सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोजाना विभिन्न प्रकार की सूचना , दस्तावेज और लिंक साझा किए जाते हैं। साइबर अपराधी इसी का फायदा उठाकर सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं, पुरस्कार, नौकरी अथवा अन्य आकर्षक जानकारियों के नाम पर संदिग्ध लिंक और फ ाइलें भेजकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। जिसमें मेहनत मजदूरी अथवा नौकरी से जमा की गई राशि अचानक खाते से निकल जाने के बाद परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर तकनीक के माध्यम से संदिग्ध मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जांच करने तथा आरोपियों तक पहुंचने की मांग की है। साथ ही ग्रामीणों ने लोगों से अपील की है कि व्हाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया ग्रुप में आने वाली किसी भी अज्ञात पीडीएफ लिंक अथवा फ ॉर्म को बिना सत्यापन के ना खोलें और किसी भी परिस्थिति में अपना ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी, एटीएम डेबिट कार्ड विवरण या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा ना करें। साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल संबंधित बैंक को सूचित करने के साथ साइबर हेल्पलाइन १९३० पर शिकायत करना महत्वपूर्ण है।

व्हाट्सएप पर ग्रुप में पीडीएफ खोलते ही खाता हुआ नील-विक्की बिसेन

विक्की बिसेन ने दूरभाष पर बताया कि १५ सितंबर को मेरा मोबाइल नंबर हैक हो गया था वह ऐसा हुआ कि व्हाट्सएप पर ग्राम के ग्रुप में एक पीडीएफ आई हुई थी। जिसे खोलने के लिए टच किया गया तो मुझे ओटीपी आया और पैसा कट गया मेरा करीब ४७०० कट गया यह जो पीडीएफ थी उसमें प्रधानमंत्री आवास लिखा हुआ था हमको लगा गांव के आवास स्वीकृत की सूची है तो उसे खोल के देखा गया था। पर वह तो एक फ ॉर्म खुला था फिर हम वापस बैक हो गए इस समय ओटीपी आया और पैसा कट गया। यह घटना करीब चार दिन से अधिक लोगों के साथ हुई है जिसमें आदर्श माहुले के २२ हजार रूपये, पंकज लिल्हारे के २५ हजार रूपये और अन्य व्यक्तियों की राशि शामिल है। हमने इसकी शिकायत करें पर समय अधिक होने से नहीं ली गई इसमें हमने फोन

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