सुप्रीम कोर्ट में एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए सरकार के ही दो बड़े संगठन, एक ने दी हरी झंडी तो दूसरा हुआ ‘लाल’

0

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में ग्रीन पटाखों को लेकर केंद्र सरकार के ही दो बड़े संगठन एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए। देश में नई पीढ़ी के ग्रीन पटाखों के कमर्शियल प्रोडक्शन की इजाजत देने पर कोई आम सहमति नहीं बन पाई है। केंद्र ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से कमर्शियल प्रोडक्शन पर फैसला लेने को कहा है।

नई पीढ़ी के ग्रीन पटाखे के फॉर्मूले को लेकर अलग-अलग राय

  • टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च-नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR-NEERI) ने नई पीढ़ी के ग्रीन पटाखे के फॉर्मूले को मंजूरी दी है और कहा है कि इनसे प्रदूषण का स्तर 40-60% तक कम होता है।
  • वहीं, इसके उलट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि इन पटाखों में अभी भी बेरियम नाइट्रेट होता है। इस केमिकल पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है, ऐसे में इन्हें मंजूरी नहीं दी जा सकती।
  • पर्यावरण मंत्रालय ने दिया ये हलफनामा
  • सरकार के इन संगठनों के परस्पर विरोधी विचारों के बीच फंसे पर्यावरण मंत्रालय ने इस मामले में एक हलफनामा दायर किया और इस मामले पर फैसला लेने का काम सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दिया।
  • मंत्रालय ने यह भी बताया कि इन फॉर्मूलों को पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) के पास भेजा गया था, जो विस्फोटक पदार्थों के लिए रेगुलेटरी बॉडी है, और उसने नए फॉर्मूलों के लिए ‘नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) जारी किया था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here