स्पोर्ट्स कोटे से सेना में चयन और फुटबॉल मैदान में ही गई जान’, इकलौते आकाश चौहान के जाने के बाद बिखरा परिवार, पिता बार-बार हो रहे बेहोश

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Army Jawan Death: पचमढ़ी में ट्रेनिंग के लिए आए 17 कुमाऊ रेजिमेंट के जवान आकाश चौहान की मौत जंगली जानवर के हमले में हो गई थी। आकाश चौहान स्पोटर्स कोटे से भर्ती हुए थे और फुटबॉल मैदान में ही उनकी जान चली गई। आकाश अपने माता-पिता के इकलौते संतान थे।पचमढ़ी: उत्तराखंड के रहने वाले आकाश चौहान को फुटबॉल खेलने का बहुत शौक था। इसी शौक की वजह से उन्हें स्पोर्ट्स कोटे से सेना में नौकरी मिली थी और 17 कुमाऊ रेजिमेंट का हिस्सा बने थे। आकाश एमपी के पचमढ़ी में ट्रेनिंग के लिए आए थे और एक जगंली जानवर के हमले में उनकी जान चली गई।बाइसन ने कर दिया हमला

आकाश चौहान मैदान में फुटबॉल खेलने के बाद किनारे पर बैठे हुए थे, तभी एक बाइसन ने उनपर हमला कर दिया, जिसमें उनकी मौत हो गई। यह घटना सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बफर जोन स्थित आर्मी एजुकेश कॉर्प्स ट्रेनिंग कॉलेज और सेंटर के परेड ग्राउंड के पास हुई है।

माता-पिता के अकेले संतान थे आकाश चौहान

वहीं, आकाश मूल रूप से उत्तराखंड के देहरादून जिले के दूधली गांव के रहने वाले थे और अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। मध्य प्रदेश वन विभाग ने उनके परिवार को आठ लाख रुपए का मुआवजा दिया है लेकिन बेटे के जाने का गम ने माता-पिता को पूरी तरह से तोड़ दिया है।फुटबॉल की वजह से ही सेना में भर्ती हुआ

आकाश चौहान को करीब से जानने वाले एक दोस्त ने बताया कि उसे बचपन से ही फुटबॉल खेलने का बहुत शौक था। इसी शौक की वजह से वह सेना में भर्ती हुआ था। उसकी भर्ती स्पोर्ट्स कोटे से हुई थी।

फुटबॉल मैदान में ही चली गई जान

परिवार के दोस्त ने कहा कि स्कूल के दिनों से वह अच्छा फुटबॉलर था। स्पोर्ट्स के जरिए सेना में जाने के लिए उसने कड़ी मेहनत की थी। उसका जीवन फुटबॉल के इर्द-गिर्द घूमता था, उसी की जान एक फुटबॉल मैदान पर चली गई। आकाश चौहान अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थेबहन की शादी भी सेना जवान से हुई

आकाश के माता-पिता गांव में रहते हैं। वे वहां आटा-चक्की चलाते हैं। मां गृहिणी हैं। वहीं, बड़ी बहन नर्स है। बहन की शादी भी सेना जवान से हुई है। बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद आकाश के पिता पूरी तरह से टूट गए हैं और बार-बार बेसुध हो जा रहे हैं।

अग्निवीर से पहले हुए भर्ती

वहीं, आकाश सेना में अग्निवीर योजना लागू होने से पहले भर्ती हुए थे। सेना के कल्याणकारी नियमों के तहत उनके निधन के बाद परिवार को लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि उन लाभों से बेटे को खोने के दुख की भरपाई नहीं कर सकती।
कचरा मुक्त अभियान जारी

वहीं, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने इस हमले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि हम पचमढ़ी को प्लास्टिक मुक्त बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हम सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि यहां कोई कचरा न हो, खासकर खाने-पीने का कचरा, जिसकी गंध से जानवर आकर्षित होते हैं।

आठ लाख रुपए की सहायता राशि दी गई

उन्होंने बताया कि वन विभाग ने उसी दिन पीड़ित परिवार को मुआवजा दे दिया था। उन्होंने कहा कि आठ लाख रुपए की यह सहायता राशि, बाघ के हमले में किसी व्यक्ति की जान जाने पर दिए जाने वाले मुआवजे के बराबर है।

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