नई दिल्ली: अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह ( Vedanta Group ) की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) चालू वित्त वर्ष के दौरान 500 से 600 मिलियन डॉलर (करीब 5000 करोड़ रुपये) का पूंजीगत व्यय (Capex) करने की योजना बना रही है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अरुण मिश्रा ने बताया कि इस निवेश का बड़ा हिस्सा पहले से चल रही परियोजनाओं पर खर्च किया जाएगा।
पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में अरुण मिश्रा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए तय कुल कैपेक्स का लगभग 80% हिस्सा जारी परियोजनाओं में लगाया जाएगा, जबकि शेष 20% हिस्सा नई परियोजनाओं के लिए आवंटित होगा, जिनकी घोषणा जल्द की जाएगी।
क्षमता विस्तार योजना
हिंदुस्तान जिंक लगभग 10 लाख टन की कुल क्षमता विस्तार पाइपलाइन पर काम कर रही है। कुल नियोजित क्षमता में से 2.5 लाख टन (25%) से जुड़ी परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जिसके लिए 12,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान है। इसमें माइनिंग और मिनरलाइजेशन शामिल हैं।
माइनिंग से जुड़े ऑर्डर दे दिए गए हैं और स्मेल्टर का निर्माण शुरू हो चुका है। हालांकि, मिलिंग और कंसंट्रेट से जुड़ी सुविधाओं के ऑर्डर अभी अंतिम चरण में हैं। शेष क्षमता विस्तार (जो क्षमता को 650 KT तक ले जाएगा) के लिए अगले 4-5 वर्षों में समान अनुपात में निवेश की आवश्यकता होगी।
सीईओ अरुण मिश्रा के अनुसार, इसका मतलब है कि औसतन 7,000 से 8,000 करोड़ रुपये का वार्षिक कैपेक्स होगा। इस बहुवर्षीय निवेश योजना का केवल 15-20% ही चालू वित्त वर्ष के दौरान वास्तविक कैश आउटफ्लो में बदलेगा।
सरकार की भी हिस्सेदारी
वेदांता लिमिटेड की सहायक कंपनी हिंदुस्तान जिंक भारत की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक, लेड और सिल्वर उत्पादक कंपनी है। कंपनी पूरी तरह से यंत्रीकृत (mechanised) भूमिगत खदानों और डिजिटल रूप से सक्षम स्मेल्टिंग सुविधाओं के जरिए माइनिंग से लेकर मेटल उत्पादन तक काम करती है। इसमें वेदांता लिमिटेड की 60.71% हिस्सेदारी और भारत सरकार की 27.92% हिस्सेदारी है।









































