अंको मे फेर मे उलझा अतिथि शिक्षकों का भविष्य?, सता रहा बेरोजगारी का डर

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पदमेश न्यूज़, बालाघाट। शासकीय शिक्षा प्रणाली में अतिथि शिक्षकों की भूमिका, शिक्षण प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने और सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।क्यो की ये अस्थायी शिक्षक ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों सहित सभी जगह शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित कर बच्चो का भविष्य गढते है।लेकिन बालाघाट जिले मे ट्राईबल अतिथि शिक्षकों के भविष्य मे संकट के बादल मंडरा रहे है,जिन्हें अब बेरोजगार होने का डर सताने लगा है।दरअसल यह पूरा मामला ट्राईबल क्षेत्रो के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले और पढ़ाने के बदले स्कोर बोर्ड में उनके अनुभव के आधार पर अंक प्राप्त करने से जुड़ा हुआ है।बताया गया कि एजुकेशन विभाग के अतिथि शिक्षकों को स्कोर कार्ड में नियमानुसार 04 से लेकर 20 अंक तक दिए जा रहे हैं लेकिन ट्राइबल क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने वाले इन अतिथि शिक्षकों के स्कोर कार्ड में अनुभव के अंक नहीं जोड़े जा रहे हैं ,जिसके चलते हर साल होने वाली अतिथि शिक्षक भर्ती में एजुकेशन विभाग के शिक्षक भी ट्राइबल क्षेत्र के लिए आवेदन कर रहे हैं, जिनके स्कोरकार्ड में प्राप्त अंकों को देखते हुए उनकी भर्ती ट्राइबल शिक्षक के रूप में की जा रही है, तो वही पिछले कई वर्षों से ट्राइबल क्षेत्र में पढाने वाले अतिथि शिक्षक को रिक्त पद नही मिल पा रहे है।वही स्कोरकार्ड में अंक न होने के चलते उन्हें बाहर किया जा रहा है,जिस पर अपनी नाराजगी जताते हुए ट्राइबल क्षेत्र के अतिथि शिक्षकों ने स्कोर कार्ड में अंक अंक दर्ज किए जाने की मांग की है। अपने इस प्रमुख मांग को लेकर ट्राइबल क्षेत्र अतिथि शिक्षकों ने जनसुनवाई मे शिकायत दर्ज कर न्याय की गुहार लगाई है। भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले सौंपे गए इस ज्ञापन में ट्राइबल क्षेत्र अतिथि शिक्षक संघ द्वारा जल्द से जल्द उनके स्कोर कार्ड में अनुभव के अंक प्रविष्ट करने की मांग की गई है। ताकि उन्हें इस वर्ष अतिथि शिक्षक भर्ती से बाहर न होना पड़े और वे कहीं बेरोजगार ना हो जाए।

दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में कई वर्षो से दे रहे सेवा
प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षकों का भविष्य इन दिनों अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है.. शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में लागू किए गए स्कोर कार्ड में अनुभव अंकों को लेकर उत्पन्न हुई स्थिति ने अतिथि शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है।आदिवासी क्षेत्रो की शासकीय स्कूलों में सेवाएं देने वाले अतिथि शिक्षक अब अपने रोजगार को लेकर असमंजस में हैं।अतिथि शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की है, लेकिन स्कोर कार्ड में अनुभव अंकों की गणना और उनके निर्धारण को लेकर स्पष्टता नहीं होने से उन्हें नुकसान होने की आशंका है।कई शिक्षकों का आरोप है कि अनुभव के अनुरूप अंक नहीं मिलने से उनकी मेरिट प्रभावित हो सकती है, जिससे नियमित भर्ती में अवसर कम हो जाएंगे।

कई अतिथियों को किया जा चुका बाहर, हम भी हो सकते हैं बेरोजगार-
शिक्षकों का कहना है कि यदि अनुभव को उचित महत्व नहीं दिया गया तो सालो की उनकी सेवा और मेहनत व्यर्थ हो जाएगी।अतिथि शिक्षको ने सरकार से मांग की है कि अनुभव अंकों के निर्धारण में पारदर्शिता बरती जाए।अतिथि शिक्षकों का मानना है कि इस मुद्दे का जल्द समाधान नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में शिक्षक बेरोजगारी की स्थिति का सामना करने को मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि हम पिछले 10- 12 वर्षों से अतिथि शिक्षक के रूप में काम कर रहे हैं ऐसे समय में यदि हम बाहर हो जाएंगे तो हम दूसरा काम भी नहीं कर पाएंगे,हम पूरी तरह से बेरोजगार हो जाएंगे। इसके पहले भी अंकों के इसी फेर के चलते कई शिक्षक बेरोजगार हो चुके हैं और हमें भी अब बेरोजगारी का डर सता रहा है।

किसी चक्कर में पिछले वर्ष 500 अतिथि शिक्षक हुए थे बेरोजगार -राजकुमार
ज्ञापन को लेकर की गई चर्चा के दौरान ट्राईबल अतिथि शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष राजकुमार यादव ने बताया कि हमारी मुख्य समस्या स्कोरकार्ड की है स्कूली शिक्षा विभाग,उनके अतिथि शिक्षकों को स्कोर कार्ड दे रहा है जिसमें अतिथि शिक्षकों को 04 से 20 अंक अनुभव के आधार पर दिए जा रहे हैं। हम अतिथि शिक्षकों को स्कूल में पढ़ने के लिए स्कोर कार्ड का होना अनिवार्य है। हम ट्राइबल क्षेत्र के अतिथि शिक्षक है हमारे स्कोर कार्ड में अनुभव के अंक दर्ज नहीं किया जा रहे हैं। हर साल सरकार अतिथि शिक्षक को बाहर कर देती है और हर साल उनकी भर्ती करती है।इस भर्ती के दौरान स्कूली अतिथि शिक्षक भी ट्राईबल अतिथि शिक्षक के लिए आवेदन करते हैं, उनके स्कोर कार्ड में 20 अंक अनुभव के हैं जो हमारे पास नहीं है, इसीलिए उन अतिथि शिक्षक की भर्ती रिक्त पदों पर हो जाती है और हमें खाली पद नहीं मिलते, हमारी मांग है कि जिस तरह स्कूली शिक्षा विभाग के अतिथि शिक्षकों को 04 से 20 अंक अनुभव के आधार पर दिए जा रहे हैं, वैसे ही ट्राइबल अतिथि शिक्षकों को भी स्कोर कार्ड में अंक दिए जाएं उन्होंने बताया कि पहले जिले में करीब 1000 अतिथि शिक्षक थे, जिसमें से ट्राइबल क्षेत्र के 500 अतिथि शिक्षक इसी चक्कर में बाहर हो गए हैं और अब हमे भी बेरोजगार होने का डर सता रहा है।
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