अतिक्रमण मुक्त की जाए गांव की शासकीय भूमि, भूमि का निस्तार में हो उपयोग

0

चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर
ग्रामीणों ने सौपा ज्ञापन
निस्तारी रास्ता खुलवाने की भी मांग,लालबर्रा के ग्राम मोहगांव धपेरा का मामला
फोटो
पदमेश न्यूज़।बालाघाट।लालबर्रा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम मोहगांव धपेरा के ग्रामीणों ने गांव की शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त किए जाने की मांग की है।अपनी इसी मांग को लेकर उन्होंने मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में ज्ञापन सौपा है।एक दर्जन के करीब ग्रामीणों द्वारा सौपे गए इस ज्ञापन में ग्रामीणों ने शासकीय चारागाह एवं अन्य मद की भूमि पर किए गए कथित अतिक्रमण को हटाने और निस्तारी रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मामले की जांच कर अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।ग्रामीणों ने बताया कि मोहगांव धपेरा में अधिकांश परिवार कृषि कार्य के साथ-साथ दुग्ध व्यवसाय और पशुपालन से जुड़े हैं। गांव के मवेशियों के लिए शासकीय मद में दर्ज छोटे झाड़ जंगल एवं घास मद की भूमि का लंबे समय से चारागाह के रूप में उपयोग किया जाता रहा है।चरवाहे भी इसी भूमि पर मवेशियों को चराने के लिए ले जाते हैं।लेकिन उक्त भूमि पर गांव के कुछ लोगो द्वारा अवैध तौर पर कब्जा किया गया है।जिससे मवेशियों को चराने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिन्होंने वहां से तत्काल अतिक्रमण हटाकर चारागाह की उक्त भूमि को अतिक्रमण मुक्त किए जाने की मांग की है।

बाड़ी बनाकर फसल लगाने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोगों द्वारा शासकीय भूमि पर कथित रूप से अवैध बाड़ी बनाकर फसल लगा दी गई है। इसके चलते चारागाह की भूमि का रकबा लगातार कम हो रहा है।ग्रामीणों के अनुसार अतिक्रमण के कारण न केवल मवेशियों के लिए चराई की समस्या उत्पन्न हो रही है, बल्कि गांव के लोगों के आवागमन के लिए उपयोग होने वाला निस्तारी रास्ता भी बाधित हो गया है।ग्रामीणों ने बताता कि मवेशी नदी से पानी पीने के बाद इसी शासकीय भूमि की ओर चरने के लिए जाते हैं, लेकिन अतिक्रमण के चलते उन्हें पर्याप्त चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इससे पशुपालकों के सामने मवेशियों के पालन-पोषण की समस्या खड़ी हो रही है।

मवेशी चराने वालो को दी जा रही धमकियां
जनसुनवाई में दिए गए आवेदन में ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि जब चरवाहा मवेशियों को शासकीय भूमि पर चराने के लिए ले जाता है, तो कथित अतिक्रमणकारी उसे रोकते हैं। ग्रामीणों के अनुसार चरवाहे को जान से मारने की धमकियां भी दी जाती है।

सीमांकन कर अतिक्रमण हटाने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से शासकीय चारागाह, छोटे झाड़ जंगल एवं घास मद की भूमि का विधिवत सीमांकन कराने की मांग की है। इसके साथ ही शासकीय भूमि पर की गई कथित अवैध बाड़ी और फसल को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा निस्तारी रास्ते को भी खुलवाने की मांग की गई है।ग्रामीणों ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने तथा ग्रामीणों एवं उनके मवेशियों के आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का आग्रह किया है।

1 वर्ष पूर्व भी किए थे शिकायत, आज तक नही हुई सुनवाई- अक्षय
ज्ञापन को लेकर की गई चर्चा के दौरान ग्रामीण अक्षय नागपुरे ने बताया कि इस संबंध में ग्रामीणों की ओर से जनसुनवाई केंद्र में आवेदन प्रस्तुत किया गया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेगा। उन्होंने बताया कि यहां कोई पहला मामला नहीं है जब अतिक्रमण हटाने की मांग ग्रामीणों द्वारा की गई हो बल्कि इसके पूर्व भी अधिकारियों को ज्ञापन सौपा जा चुका है, वही 1 वर्ष पूर्व जनसुनवाई में भी ग्रामीणों

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here