बालाघाट (पदमेश न्यूज़)।एक ओर शासन प्रशासन द्वारा वर्षों से सरकारी भूमि पर निवास करने वाले लोगों को पट्टे देकर प्रधानमंत्री आवास सहित अन्य शासकीय योजना का लाभ दिए जाने का दावा किया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय सहित समस्त तहसील व ऐसे कई ग्रामीण क्षेत्र हैं जहां अब भी शासकीय भूमि पर वर्षों से निवास करने वाले गरीबों को आवासीय पट्टे नहीं मिल पाए हैं। जिसके चलते उन्हें शासन प्रशासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जो पट्टे की मांग को लेकर पिछले कई वर्षों से शासकीय कार्यालयों के चक्कर काटते नजर आ रहे हैं लेकिन उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिल रहा है।ताजा मामला टेकाड़ी पंचायत अंतर्गत आने वाले पीपरटोला का है।जहा शासकीय भूमि पर पिछली कई पीडियो से झोपड़ीनुमा मकान बनाकर रह रहे लोगो को अब तक आवासीय पट्टे प्रदान नही किए गए है।जिसके चलते वे उक्त भूमि पर अपने पक्के मकान नहीं बना पा रहे हैं और ना ही उन्हें पीएम आवास योजना का लाभ मिल पाया है।जिसके लिए वे शासकीय कार्यालयो के चक्कर काटने को मजबूर है लेकिन उन्हें आवासीय पट्टे जारी नही किए जा रहे है।पट्टे की इसी मांग को लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुचे 2 दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने टेकाड़ी पंचायत सरपंच प्रतिनिधि तारा कावरे के नेतृत्व में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में एक ज्ञापन सौपा है।जिसमें उन्होंने यथाशीघ्र आवासीय पट्टा जारी कर उन्हें पीएम आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।
पट्टे न मिलने से नहीं मिल रहा पीएम आवास का लाभ
उक्त मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से निवास करने के बावजूद भी हमें आज तक पट्टे प्रदान नहीं किए गए हैं। जहां पट्टे न होने के चलते हमें पीएम आवास योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए कई बार आवेदन निवेदन किया गया है। लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।पिछले कई वर्षों से पट्टो की मांग को लेकर शासकीय कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।लेकिन हर बार हर जगह सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।हमारी मांग है कि जल्द से जल्द हमें आवासीय पट्टे प्रदान कर प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।वहीं उन्होंने पण्डार झरना क्षेत्र में पर्यटकों से लिए जा रहे शुल्क के बावजूद विकास कार्य नहीं होने पर नाराजगी जताई है।
सर्वे के बावजूद भी 50 परिवारों को नही मिले पट्टे
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत टेकाड़ी अंतर्गत ग्राम पीपरटोला में लगभग 50 परिवार कई पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं, लेकिन आज तक उनके मकानों के पट्टे नहीं बनाए गए।वर्ष 2024 में आबादी सर्वे कराया गया था, जिससे लोगों को उम्मीद जगी थी कि वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो जाएगा। हालांकि सर्वे के बाद केवल 10 से 11 लोगों के ही पट्टे बन पाए, जबकि अधिकांश परिवार अब भी पट्टे से वंचित हैं।उन्होंने बताया कि स्थानीय पटवारी द्वारा उन्हें बताया गया कि जिन घरों के पट्टे नहीं बन पाए हैं, वह भूमि “घास भिड़” श्रेणी में आती है। इस कारण लंबे समय से लोग प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझे हुए हैं।बिना पट्टे के रहने से उन्हें शासन की कई योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता और भविष्य को लेकर असुरक्षा बनी रहती है।
पर्यटकों से लिया जा रहा भारी शुल्क, सुविधाए कुछ भी नही
उधर ग्रामीणों ने गांगुलपारा क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध पण्डार झरना में पर्यटकों से लिए जा रहे शुल्क पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह क्षेत्र कई वर्षों से प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में पहचान बना चुका है।जहां मप्र सहित अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।फॉरेस्ट विभाग द्वारा पर्यटकों से प्रवेश शुल्क के रूप में प्रति व्यक्ति 12 रुपये, दोपहिया वाहन से 25 रुपये, चारपहिया वाहन से 100 रुपये, मिनी बस से 250 रुपये तथा बड़ी बस से 500 रुपये तक शुल्क लिया जाता है। शुल्क वसूली के बावजूद क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। उन्होंने बताया कि वहां न बैठने की समुचित व्यवस्था है और न ही पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध है। वहीं दूसरी ओर विभाग ने अपने उपयोग के लिए अच्छा टिकट काउंटर बना लिया है।वही पण्डार झरना तक पहुंचने वाला मार्ग पूरी तरह जर्जर हो चुका है और कच्ची सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे बरसात के दिनों में आवागमन अत्यंत कठिन हो जाता है।
पट्टे और व्यवस्थाओं के नाम पर मिल रहा सिर्फ आश्वासन- तारा कावरे
ग्राम टेकाड़ी सरपंच प्रतिनिधि तारा कावरे ने बताया कि दक्षिण वन मंडल के अधिकारियों एवं रेंजर से कई बार चर्चा की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि जिस मार्ग से पर्यटक आवाजाही करते हैं, उसी रास्ते से वन विभाग के भारी वाहन बांस एवं जलाऊ लकड़ी का परिवहन भी करते हैं, जिससे सड़क की स्थिति और खराब हो रही है।जब इस विषय पर शुल्क प्राप्तकर्ताओं और संबंधित अधिकारियों से चर्चा की जाती है, तो वे शुल्क की राशि बोर्ड में जमा होने की बात कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।हमारी मांग है कि यदि शुल्क लिया जा रहा है तो उसका उपयोग स्थानीय विकास और सुविधाओं के विस्तार में क्यों नहीं किया जा रहा। आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए शीघ्र सड़क सुधार, पेयजल, बैठने की व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक विकास कार्य कराए जाएं, ताकि पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों को भी परेशानियों का सामना न करना पड़े।वही पीपरटोला में पिछली कई पीढ़ियों से निवास करने वाले 50 परिवारों को अब तक पट्टे आवंटित नही किए गए है।जहा पट्टे की मांग पर आज भी सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा है।










































