अस्पताल प्रबंधन पर सुविधा नही मिलने का ग्रामीणों ने लगाया गंभीर आरोप
वारासिवनी। खैरलांजी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फि र गंभीर सवालों के घेरे में हैं। सडक़ हादसे में गंभीर रूप से घायल एक युवती को जिला अस्पताल बालाघाट रिफर किए जाने के बावजूद समय पर एंबुलेंस नहीं मिली। वाहन के अभाव में युवती को करीब तीन घंटे तक अस्पताल में ही दर्द से जूझना पड़ा जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
यह है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार रात्रि करीब ८ बजे लालबर्रा निवासी विस्मिता पिता रविशंकर नगपुरे अपने गांव लौट रही थीं। इसी दौरान खैरलांजी से लगभग दो किलोमीटर दूर नवेगांव के पास उनकी मोटरसाइकिल दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में गंभीर रूप से घायल युवती को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खैरलांजी लाया गया । जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल बालाघाट रिफर कर दिया। डॉक्टरों के द्वारा रिफर किए जाने के बाद जब एंबुलेंस की आवश्यकता पड़ी तो अस्पताल में हडक़ंप मच गया। अस्पताल में मौजूद जननी एक्सप्रेस १०८ और अन्य दो एंबुलेंस तकनीकी या अन्य कारणों से बंद पाई गईं। नतीजतन दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था होने तक घायल युवती और उसके परिजनों को करीब तीन घंटे तक भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस लंबी देरी के दौरान युवती की हालत लगातार चिंताजनक होती गई। जबकि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पूर्व मंत्री प्रदीप जायसवाल और पूर्व विधायक टामलाल सहारे के द्वारा अलग अलग समय पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को एंबुलेंस दान दी गई थीं। इसके बावजूद प्रबंधन की कथित लापरवाही के कारण आपातकाल में मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है ,जो क्षेत्रवासियों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच तूफान एंबुलेंस के चालक मनोज माहुले की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी वेतन भोगी इस चालक की ड्यूटी एंबुलेंस चलाने के बजाय बीएमओ डॉ.खिलेंद्र पाल के निजी वाहन के संचालन में लगाई गई है। अब यह बड़ा जांच का विषय है। आपातकाल में इस तरह की लापरवाही ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय नागरिकों और परिजनों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्यवाही की मांग की है।
इनका कहना हैं
दूरभाष पर चर्चा में बताया कि एक एक्सीडेंट आया हुआ था जिसमें घायल की स्थिति गंभीर थी। जिसे १०८ की एडवांस लाइफ सपोर्ट वाली एंबुलेंस की जरूरत थी। इसी कारण १०८ में बात करने और बालाघाट से एंबुलेंस उपलब्ध होने में समय लगा। बाकी हमारे यहां सामान्य एंबुलेंस उपस्थित है और उसकी सेवा लोगों को मिल रही है।










































