चीन से युद्ध के लिए ताल तो ठोक रहा जापान, क्या सेना इतनी शक्तिशाली है? भारत से बड़ी उम्मीदें

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नई दिल्ली: जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची 1 से 3 जुलाई तक भारत की अपनी तीन दिन की आधिकारिक यात्रा के लिए बुधवार शाम नई दिल्ली पहुंच रही हैं। पद संभालने के बाद यह उनकी भारत की पहली आधिकारिक यात्रा होगी। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद ताकाइची शायद जापान की पहली प्रधानमंत्री हैं जो चीन को लेकर इतनी ज्यादा आक्रामक हैं। उन्होंने ताइवान की आजादी की रक्षा करने की बात कही है जिसके बाद चीन उन्हें युद्ध तक के लिए ललकार चुका है।

पीएम ताकाइची के आने के बाद जापान और चीन के संबंध काफी खराब हो चुके हैं और टोक्यो काफी तेजी से अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है। जापान ने चीन से लगने वाले अपने तटीय इलाकों में लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों को भी तैनात किया है। इसीलिए जानना जरूरी हो जाता है कि क्या जापान की सेना इतनी शक्तिशाली है कि वो चीन का मुकाबला कर सके। दूसरे विश्वयुद्ध से पहले जापान ने चीन में जो क्रूरता की थी चीन उसे नहीं भूला है।जापान की सेना किस समस्या से जूझ रही है?

15 जून को जापान की विपक्षी सांसद चिकगे कोगा ने ऊपरी सदन में एक कमिटी मीटिंग के दौरान कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे ‘सेल्फ-डिफेंस फोर्स’ (SDF) में भर्ती होते हैं जबकि अमीर परिवारों के बच्चे ऐसा नहीं करते हैं। रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई और इसे पक्षपाती और अस्वीकार्य बताया। कोगा ने अपनी टिप्पणी वापस ले ली और माफी भी मांग ली। इसके अलावा उनकी अपनी पार्टी कॉन्स्टिट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी उन्हें फटकार भी लगाई।

हालांकि सांसद चिकगे कोगा की टिप्पणी आंकड़ों के हिसाब से सही नहीं है लेकिन आंकड़ों को देखने पर एक दूसरी बड़ी कमजोरी का पता चलता है। जापान की सेना में भर्ती में कमी एक गंभीर समस्या है।

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