नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद और एक दूसरे मामले में आरोपी शरजील इमाम को जमानत न दिए जाने पर बेहद सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि जमानत एक नियम है और जेल अपवाद है।
भटक गई थी बेंच
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में एक दूसरी बेंच की तरफ से दिए गए अपने पहले के फैसले के कुछ पहलुओं पर आपत्तियां जाहिर की हैं। उस फैसले में 2020 के दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर कड़ी टिप्पणी की है कि दो जजों वाली बेंच, तीन जजों वाली बेंच के फैसले में व्यक्त किए गए विचारों से भटक गई थी।
फैसले का ठीक से पालन नहीं
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा है कि एक दूसरी पीठ ने तीन-न्यायाधीशों की पीठ की तरफ से दिए गए उस फैसले का ठीक से पालन नहीं किया, जिसमें गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामलों में मुकदमे में होने वाली लंबी देरी को जमानत का आधार माना गया था।










































