तुर्की की ‘गेजहिन’ मिसाइल के सामने कितनी घातक है भारत की ‘ब्रह्मोस’? भूमध्य सागर में आमने-सामने

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अंकारा: तुर्की ने अपने गेजहिन क्रूज मिसाइल की पहली झलक दिखाई है जिसकी तुलना अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल से की जा रही है। तुर्की की तरफ से उस वक्त तस्वीरें जारी की गई हैं जब साइप्रस की मीडिया में दावा किया जा रहा है कि देश भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल में दिलचस्पी दिखा रहा है। साइप्रस और ग्रीस, दोनों की तुर्की से दुश्मनी है और दोनों भारतीय ब्रह्मोस को तुर्की के खिलाफ काउंटर स्ट्रैटजी के तौर पर पेश कर रहे हैं।

तुर्की के गेजहिन क्रूज मिसाइल को अमेरिका की टोमहॉक क्रूज मिसाइल का स्वदेशी रूप बताया जा रहा है। इस मिसाइल की रेंज 1000 किलोमीटर से ज्यादा है और कई रिपोर्ट में 1500 किलोमीटर होने की बात कही गई है। यह मूल रूप से तुर्की सशस्त्र बलों की उस क्षमता का विस्तार करती है जिसके तहत वे सुरक्षित समुद्री लॉन्च स्थितियों से पूर्वी भूमध्य सागर, काला सागर, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसीलिए भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल से इसकी तुलना की जा रही है।तुर्की की गेजहिन बनाम भारत की ब्रह्मोस मिसाइल

गेजहिन और ब्रह्मोस दोनों की क्रूज मिसाइलें हैं इसीलिए दोनों को इंटरसेप्ट करना मुश्किल है। लेकिन दोनों को अलग अलग रणनीतिक जरूरतों के हिसाब से बनाया गया है। गेजगिन जहां लंबी दूरी के सबसोनिक (धीमी गति) हमलों के लिए है वहीं ब्रह्मोस अपनी अत्यधिक तेज गति (सुपरसोनिक) और अचूक मारक क्षमता के लिए दुनिया भर में मशहूर है। गेजहिन का अभी निर्माण हो ही रहा है और शायद इसका पहला टेस्ट ट्रायल किया गया है। इसके पूरी तरह बनने में एक-दो साल और लग सकते हैं।

गेजहिन मिसाइल का वजन करीब 2 टन के आसपास है जबकि ब्रह्मोस का वजन लगभग 2.5 से 3 टन के करीब है।

गेजहिन लंबी दूरी की सबसोनिक लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल है जबकि ब्रह्मोस मध्यम दूरी की सुपरफास्ट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है।

गेजहिन की स्पीड सबसोनिक है यानि 0.7 से 0.8 मैक, जबकि ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल है जिसकी स्पीड 2.8 से 3.0 मैक यानि ध्वनि से लगभग 3 गुना तेज स्पीड है।

गेजहिन की मारक क्षमता 1,000 से 1,500 किलोमीटर अनुमानित है जबकि ब्रह्मोस की रेंज 290 से 500 किलोमीटर के बीच मानी जाती है।

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