नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट इतिहास में जब भी किसी महान खिलाड़ी के संन्यासी होने की स्क्रिप्ट लिखी जाती है, तो उसमें विवाद, कशमकश और कड़वाहट का तड़का न लगे, ऐसा कम ही देखा गया है। इंग्लैंड के खिलाफ चल रही वनडे सीरीज के बीच रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर जो बवाल मचा है, उसने एक बार फिर भारतीय क्रिकेट के सबसे कड़वे सच को उजागर कर दिया है। सोशल मीडिया और मीडिया गलियारों में चर्चा तेज है कि हिटमैन को जबरिया रिटायरमेंट की ओर धकेला जा रहा है और इस पूरे फैसले में वर्तमान वनडे कप्तान शुभमन गिल की मौजूदगी भी इस विवाद को हवा दे रही है। रोहित शर्मा के साथ हो रहे इस बर्ताव को देखकर क्रिकेट फैंस को आज से 14 साल पुराना वो दौर याद आ गया है, जब क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था।
जब एमएस धोनी नहीं चाहते थे वनडे टीम में सचिन की मौजूदगी
यह भारतीय क्रिकेट का वो इतिहास है जिसे चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता। साल 2011 में भारत को अपनी कप्तानी में विश्व विजेता बनाने वाले महेंद्र सिंह धोनी भविष्य की टीम की नींव रखना चाहते थे। उस वक्त ऑस्ट्रेलिया में खेली गई सीबी सीरीज के दौरान रोटेशन पॉलिसी और फील्डिंग का हवाला देकर सीनियर खिलाड़ियों को लेकर कड़े फैसले लिए जा रहे थे। धोनी का मानना था कि आगामी विश्व कप को देखते हुए अब युवाओं को ज्यादा मौके मिलने चाहिए और वे सचिन तेंदुलकर को वनडे स्क्वाड का हिस्सा बनाए रखने के पक्ष में नहीं थे।










































