नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार, अशक्त और अस्वस्थ कैदियों की समय से पहले रिहाई के लिए 3 महीने के भीतर स्पष्ट नीति तैयार कर उसे नोटिफाई करें। कोर्ट ने ऐसी रिहाई की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए तकनीक आधारित डिजिटल व्यवस्था लागू करने का भी निर्देश दिया।
विधिक सेवा प्राधिकरण ( NALSA ) की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में देशभर में 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार, अशक्त और असहाय कैदियों की मानवीय आधार पर समय पूर्व रिहाई के लिए एक समान दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई थी। e-Prisons पोर्टल के जरिए होगी पूरी प्रक्रियाः सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी आवेदन e-Prisons पोर्टल के माध्यम से ही पूरे किए जाएं।पोर्टल पर आवेदन की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से दर्ज होनी चाहिए
अदालत ने कहा कि इस पोर्टल पर आवेदन की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से दर्ज होनी चाहिए, जिसमें आवेदन दाखिल करने से लेकर मेडिकल जांच, जेल अधिकारियों की रिपोर्ट, मेडिकल बोर्ड की सिफारिश, अंडरट्रायल रिव्यू कमिटी की राय, सक्षम प्राधिकारी का अंतिम फैसला और उसके कारण तक सभी जानकारी उपलब्ध हो।
6 महीने में दाखिल करनी होगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार तथा सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशो को 6 महीने के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें बताना होगा कि निर्देशों के पालन के लिए क्या कदम उठाए गए, नई नीति तैयार करने की क्या स्थिति है, कितने कैदियों की पहचान समयपूर्व रिहाई के लिए की गई है।










































