नई दिल्ली: राम मंदिर चंदा विवाद के कथित मामले के बाद अब धार्मिक संस्थानों में मिलने वाले दान और उसके प्रबंधन को लेकर बहस शुरू हो गई है। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता राशिद अल्वी और हजरत निजामुद्दीन दरगाह कमेटी के सज्जादा नशीन एवं अध्यक्ष सैयद फरीद अहमद निजामी ने मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों में मिलने वाले दान और जकात की व्यवस्था पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मस्जिदों में जकात नहीं दी जाती। जकात जरूरतमंद और गरीब लोगों के लिए होती है, न कि मस्जिदों के लिए। मस्जिदों का संचालन एक कमेटी करती है, जहां इमाम नमाज पढ़ाते हैं और नमाज के बाद लोग वहां से चले जाते हैं। मस्जिद के भीतर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होती, जहां इस प्रकार की चोरी का सवाल खड़ा हो। मंदिर और मस्जिद की तुलना करना उचित नहीं है क्योंकि दोनों अलग-अलग आस्था के केंद्र हैं। राम मंदिर में जो कुछ हुआ, वह करोड़ों लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ है। इस मामले में गठित एसआईटी की जांच केवल दिखावा प्रतीत होती है और इससे वास्तविक दोषियों तक पहुंचना मुश्किल है।









































