मुगलों के जमाने का तोप कहां, नरवर किले से चोरी गई तोप का तीन महीने बाद भी नहीं चला पता

0

Narwar Fort Cannon Theft: नरवर किले से तीन महीने पहले चोरी हुई 16वीं शताब्दी की 3.5 टन वजनी मुगलकालीन तोप अभी तक बरामद नहीं हो पाई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस सनसनीखेज चोरी के पीछे राजस्थान का एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है, जिसमें करीब 20 लोगों की संलिप्तता का शक है।शिवपुरी: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक नरवर किले से तीन महीने पहले चोरी हुई 16वीं सदी की मुगलकालीन तोप का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। 3.5 टन वजनी इस भारी-भरकम प्राचीन तोप के गायब होने के मामले में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसमें राजस्थान के एक बड़े आपराधिक नेटवर्क के शामिल होने के संकेत मिल रहे हैं।

दो बार किया गया था चोरी का प्रयास

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस प्राचीन तोप को चुराने के लिए दो बार प्रयास किए गए थे। बदमाशों का पहला प्रयास 3 और 4 जुलाई की दरमियानी रात को असफल रहा था, लेकिन इसके बाद आरोपी 15-16 जुलाई की रात को दोबारा आए और इस भारी-भरकम तोप को किले से हटाने में कामयाब रहे।जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और टोल प्लाजा के रिकॉर्ड खंगाले, जिससे एक महिंद्रा बोलेरो पिकअप वाहन का सुराग मिला जो राजस्थान के करौली की तरफ जा रहा था। इस सुराग के आधार पर पुलिस ने 25 जुलाई को अमन कुमार मीना और टिम्मु राम मीना को गिरफ्तार कर लिया था, जो फिलहाल शिवपुरी जेल में बंद हैं।

राजस्थान के नेटवर्क और पंचाना बांध विवाद पर नजर

पुलिस अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि इस वारदात के लिए वाहन किसने उपलब्ध कराया था, तोप को हटाने में किन लोगों ने मदद की और चोरी के बाद उसे छिपाकर कहां ले जाया गया। सूत्रों का कहना है कि इस चोरी को अंजाम देने में राजस्थान के एक संदिग्ध गांव के करीब 20 लोगों की मदद ली गई होगी।

इसके अलावा, पुलिस इस बात की भी गहराई से पड़ताल कर रही है कि क्या इस घटना का कोई संबंध लंबे समय से चले आ रहेपंचाना बांध नहर-पानी विवाद से तो नहीं है, हालांकि अभी तक दोनों मामलों के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं हो सका है। पुलिस और प्रशासनिक टीमें मामले की हर पहलू से जांच कर रही हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here