नई दिल्ली: यह कहानी है दो चचेरे भाइयों की। इनके नाम हैं अनुराग भाटिया और आयुष भाटिया। दोनों गुरुग्राम के रहने वाले हैं। बिना किसी बाहरी फंडिंग के सिर्फ डिलीवरी मॉडल के जरिए इन भाइयों ने सफल ब्रांड खड़ा कर दिया है। इसका नाम ‘मुगल अफेयर’ है। यह ब्रांड ‘हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड’ के तहत चलता है। बिना किसी बाहरी फंडिंग के इसने 7.2 करोड़ रुपये की सालाना कमाई (ARR) तक का सफर तय किया है। इस क्लाउड किचन ब्रांड की कहानी स्वाद, सटीक बिजनेस रणनीति और अटूट निरंतरता की मिसाल है। आइए, यहां अनुराग और आयुष की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।
साल 2018 के अंत में अनुराग और आयुष ने देखा कि दिल्ली-NCR के लोग उत्तर भारतीय और मुगलई खाने के बेहद शौकीन हैं। लेकिन, डिलीवरी के जरिए रेस्तरां जैसा स्वाद और गुणवत्ता पाना काफी मुश्किल था। पारंपरिक फाइन-डायनिंग का खाना पैक होने के बाद अपना असली स्वाद खो देता था। वहीं, सस्ते डिलीवरी ऑप्शंस क्वालिटी से समझौता करते थे। इस अंतर को पाटने के लिए अप्रैल 2019 में डीएलएफ साइबर सिटी, गुरुग्राम से दोनों ने पहला किचन शुरू किया। ऐसा करने से पहले दोनों ने 5 महीनों तक गहन रिसर्च की। 2 घंटे तक पैक खाने को रखकर उसके स्वाद और तापमान का परीक्षण किया।










































