अंधविश्वास से बढ़ा बैगा अंचल पर बीमारी का साया..!

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3 मासूमों की मौत के बाद हड़कंप,हर घर में बुखार के मरीज
सरकारी दवाई से ज्यादा झाड़फूंक में विश्वास कर रहे ग्रामीण
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट,प्रभावित उपचार कराने में कर रहे आनाकानी
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पदमेश न्यूज़,बालाघाट। जिले के बैहर विकासखंड की अडोरी पंचायत के बैगा आदिवासी गांव बोनदारी, कोहनीमोर और कुंडेकसा इन दिनों संक्रमणजनित बीमारियों की चपेट में हैं। घने जंगलों के बीच बसे इन गांवों में बीमारी ने ऐसा कहर बरपाया है कि हर घर में कोई न कोई बुखार से पीड़ित मिल रहा है। सबसे दर्दनाक बात यह है कि कोहनीमोर गांव में दो सगे भाई-बहन और कुंडेकसा में एक मासूम बच्ची की मौत के बाद पूरे क्षेत्र में भय और शोक का माहौल है। इन मासूमों की मौत ने ग्रामीणों के साथ-साथ प्रशासन को भी झकझोर दिया है।

बारिश के मौसम में फैली इस बीमारी ने सबसे अधिक छोटे बच्चों को अपनी गिरफ्त में लिया है। गांवों में कई बच्चे तेज बुखार, सर्दी, खांसी और कमजोरी से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में कई मरीजों में मलेरिया जैसे लक्षण भी पाए गए हैं। लगातार बढ़ते मरीजों की संख्या ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार प्रभावित गांवों में पहुंचकर मरीजों की जांच, दवा वितरण और घर-घर सर्वे का कार्य कर रही हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीणों का स्वास्थ्य सेवाओं पर घटता भरोसा बन गया है।

जागरूकता की कमी, झाड़ फूक पर ज्यादा भरोसा
बैगा समुदाय के अनेक परिवार आज भी बीमारी का इलाज अस्पताल के बजाय पारंपरिक झाड़-फूंक और स्थानीय बैगा वैद्यों से कराने में विश्वास रखते हैं। उनका मानना है कि यही तरीका उन्हें जल्दी राहत देता है। इसी कारण कई मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।

स्वास्थ विभाग ने संभाला मोर्चा
इधर, स्वास्थ्य विभाग लगातार ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहा है कि बुखार, मलेरिया और अन्य संक्रमणजनित बीमारियों का समय पर चिकित्सकीय उपचार ही जीवन बचा सकता है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य टीम से संपर्क करें और झाड़-फूंक के भरोसे इलाज में देरी न करें।

पंचायत ने शुरू किया विशेष अभियान
उधर, हालात की गंभीरता को देखते हुए अडोरी पंचायत ने भी मोर्चा संभाल लिया है। गांवों में विशेष सफाई अभियान शुरू किया गया है। नालियों की सफाई, जलभराव वाले स्थानों को चिन्हित कर उन्हें साफ कराया जा रहा है, ताकि मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सके। वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग ने भी पेयजल स्रोतों को सुरक्षित बनाने के लिए सभी हैंडपंपों में क्लोरीनीकरण का कार्य तेज कर दिया है, जिससे दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सके।

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