आशा-ऊषा सहयोगिनी-कार्यकर्ताओं ने सौंपा ज्ञापन

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आशा कार्यकर्ताओं और सहयोगिनी की मांगों को लेकर अलग-अलग संगठन बीते एक सप्ताह से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर बैठे हैं। शुक्रवार को पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा बिसेन जिला अस्पताल परिसर पर 23 दिसंबर से हड़ताल पर बैठीं आशा कार्यकर्ता के बीच पहुंचीं और उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली। एक सवाल के जवाब में जिला पंचायत पूर्व अध्यक्ष रेखा बिसेन ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के पास बजट की कोई कमी नहीं है। सरकार भी नहीं चाहती कि किसी को उसके काम का पैसा न दे। दरअसल, स्थानीय स्तर पर अधिकारी वर्ग व्यवस्थाओं को गड़बड़ करते हैं। श्रीमती बिसेन ने आगे कहा कि अधिकारियों को उनके काम की याद दिलाना पड़ता है।

पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा बिसेन ने आशा कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचकर उनकी मांग पूरी करने का प्रयास करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि ये आशा कार्यकर्ताओं का हक है कि वे अपनी मांग रख सकें। आशा कार्यकर्ताओं की प्रशासकीय और स्थानीय मांगें हैं, लेकिन इनका समाधान नहीं निकल पा रहा है। आपको बता दें कि जिलेभर की आशा-ऊषा कार्यकर्ताएं नियमितीकरण और मानदेय देने की मांग कर रही हैंं। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं के अलग-अलग संगठन इन मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैंं। बीतों दिनों जिला अस्पताल के निरीक्षण में पहुंचे आयुष मंत्री रामकिशोर कावरे से भी आशा कार्यकर्ताओं ने मिलकर अपनी मांगों को लेकर ध्यान आकर्षित कराया था। श्रीमती बिसेन ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं के लिए जितना संभव होगा, उतना प्रयास किया जाएगा।

वहीं, दूसरी तरफ शुक्रवार को मप्र आशा-ऊषा सहयोगिनी कार्यकर्ता संगठन ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी लंबित मांगों को लेकर कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि आशा-ऊषा सहयोगिनी को साल 2006 में नियुक्त किया गया था, लेकिन आज उन्हें किसी तरह का मानदेय नहीं मिला है। संगठन ने मांग रखी कि आशा पर्यवेक्षक को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए। आशा सहयोगी को 15 हजार और आशा कार्यकर्ता को 10 हजार रुपए मानदेय दिया जाए। आशा कार्यकर्ताओं को उनके कार्य की राशि टुकड़ों में न दी जाए सहित अन्य मांगें रखीं।

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