मौसमी बीमारियो ने किसानों के माथे पर खींची चिंता की लकीरें
फसल में पोंगा,करपा, तना छेदक, ब्लास्टर और गंगाई सहित अन्य बीमारियों का दिख रहा प्रकोप
कीट प्रकोप से भी किसान परेशान,फसलों को बचाने तरह तरह से कर रहे प्रयोग
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पदमेश न्यूज़।बालाघाट।पल-पल में बदलते जा रहे हैं मौसम के चलते जहां एक ओर मानव स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है तो वही बदलते मौसम ने किसानों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ा दी है।क्योंकि आए दिनों मौसम में बदलाव के साथ कभी बारिश,कभी धूप ,कभी छाव और तो कभी मौसम ढका होने के चलते मुख्यतः धान की फसल में बदरा रोग सहित अन्य बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया हैं। तो वही अब कीट पतंगे भी किसानों की फसलों को बर्बाद करने में कोई कसर नही छोड़ रहे है।बताया जा रहा है कि यदि इस रोग की मात्रा बढ़ गई तो किसानों को भारी नुकसान होगा।उधर पल-पल बदलते मौसम के बीच कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एडवाइजर जारी की है।जिन्होंने अपनी धान की भूरा ,मऊ, औऱ कीट पतंगों से सुरक्षा करने की सलाह दी है। तो वही मौसम वैज्ञानिकों द्वारा आगे भी मौसम में भारी बदलाव आने के संकेत दिए हैं। मतलब साफ है कि यदि मौसम वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी सच साबित होती है और फिर से बारिश,मौसम में उतार चढ़ाव होता है तो किसानों के खेतों में लहलहाती फसल बर्बाद हो जाएगी। तो वही धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा बदरा महू सहित अन्य रोग भी काफी तेजी से फसलों में फैल जाएगा। जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा ।
किसानों के माथे पर खिंची चिंता की लकीरें
अचानक बारिश व कड़ी धूप से धान की सेहत खराब हो रही है। धान बदराने लगी है। जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। इस प्राकृतिक आपदा से किसानों को नुकसान होने की संभावना प्रबल बनी हुई है। ऐसे में किसानों के माथे में चिंता की लकीरें ला दी है।
रोग से उत्पादन होगा कम
किसानों ने बताया कि कुछेक किसानों ने खरीब सीजन में देरी से धान की रोपाई की थी। ऐसे में उन फसलों पर भी मौसम का असर पड़ रहा है।पल पल में बदलते तापमान से इसमें भी रोग बढ़ने की संभावना बनी हुई है।किसानों के अनुसार मौसम में खराबी के चलते धान में बदरा रोग लगता है। इस बीमारी में पौधों में धान तो लगता है लेकिन उसके अंदर दाना नहीं होता है। इस वर्ष यह रोग सभी किसानों के खेतों में देखने को मिल रहा है। किसानों का कहना है कि यदि मौसम में लगातार इसी तरह बदलाव होते रहा तो खरीब सीजन में भी धान का उत्पादन काफी प्रभावित होगा। जिससे किसानों को नुकसान होने की संभावना बनी हुई है।
अब किट पतंगे पहुँचा रहे नुकसान
धान में लगे विभिन्न रोगो से परेशान किसान अब फसलों पर कीट व्याधी के प्रकोप से परेशान है। जानकारी के अनुसार पहले बारिश और अब कड़ी धूप निकलने से किसानों की फसलों पर कीट प्रकोप देखा जा रहा है। इस कारण एक बार फिर किसान चिंतिंत नजर आ रहे हैं। फसलों पर नए नए कीटों का प्रकोप देखने को मिल रहा है।जिससे फसले नष्ट हो रही है।
रात के समय फसल कर रहे चट
बताया गया कि यह कीट आम तौर पर रात में धान के खेतों को नुकसान पहुंचाता है। यह कीट पत्तियों के साथ-साथ बालियों को भी काटता है। यह कीट दिन के समय में खेत की मेढ़ों में छिप जाता है, जो शाम होते ही अंधेरे में फसलों को चट करना शुरू कर देता है। इस संबध में कृषि विशेषज्ञों ने खेतों का सर्वे करना शुरू कर दिया है। जिन क्षेत्रों से धान की फसल पर फौजी कीट की सूचनाएं मिल रही हैं। विशेषज्ञ मेढ़ों का निरीक्षण कर किसानों को दवा के छिडक़ाव की सलाह दे रहे। विभिन्न प्रकार की दवाईयां कृषि विशेषज्ञ किसानों को बता रहे है।जिसमे सर्व प्रथम मेंढो पर दवाईयों का छिड़ांव करने की सलाह दी जा रही है।
इन बीमारियों का देखा जा रहा प्रकोप दवा भी बे-असर
धान की फसलों में लग रही विभिन्न बीमारियों ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं इन दिनों जिले के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों द्वारा लगाई गई धान की फसल में पोंगा, करपा,तना छेदक, ब्लास्टर और गंगाई जैसी घातक बीमारियों का प्रकोप देखा जा रहा है जिससे किसानों की फसल खराब हो रही है वहीं किसानों को इससे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों के अनुसार उनके क्षेत्र में बीमारी का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है वहीं फसल में लगी बीमारियो के खात्मे के लिए किया जा रहा विभिन्न दवाइयों का छिड़काव भी बीमारी को कंट्रोल नहीं कर पा रहा है जिससे किसान काफी चिंतित हैं। किसान बताते हैं कि बीमारी पौधे के अंदर तने में है जिससे दवा का छिड़काव करने पर भी पौधे के अंदर के कीट नहीं मरते।दवा का छिड़काव करने पर भी इन बीमारियों से निजात नहीं मिल रही है जिसको लेकर किसान काफी परेशान है किसानों के समझ नहीं आ रहा है कि वह इस बीमारी से निजात पाने और अपनी फसलों को बचाने के लिए अब क्या उपाय करें।
Byte शिव बघेले, किसान गोंगलाई





































