खरीदी के एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी नही पहुंचे किसान समर्थन मूल्य में चना विक्रय करने

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पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। शासन के निर्देशानुसार जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्या. शाखा लालबर्रा अंतर्गत सेवा सहकारी समिति मिरेगांव को चना खरीदी का केन्द्र बनाया गया है। जिनके द्वारा बकोड़ा कृषि उपज मंडी में चना खरीदी किया जाना है जहां गत १५ अप्रैल से चना खरीदी कार्य प्रारंभ कर दिया गया है और खरीदी प्रारंभ हुए एक सप्ताह बीत चुका है परन्तु किसान अपनी उपज विक्रय करने नही पहुंच रहे है। जिसका मुख्य कारण बताया जा रहा है कि शासन के द्वारा चना का समर्थन मूल्य ५८७५ रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। जबकि बाजार में व्यापारी उससे अधिक दामों में खरीदी कर रहे है इसलिए वे शासन को विक्रय न करते हुए बाजार में व्यापारी को विक्रय कर रहे है। इस तरह से किसान चना सहित अन्य दलहन फसलों को समर्थन मूल्य में विक्रय करने में रूची नही दिखा रहे है जिसके कारण लालबर्रा के जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर चना खरीदी के लिए बनाये गये बकोड़ा कृषि उपज मंडी खरीदी केन्द्र में खरीदी प्रारंभ हुए एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी अब तक एक भी किसान अपनी उपज चना विक्रय करने नही पहुंचा है। जबकि आगामी ३१ मई तक ही समर्थन मूल्य में खरीदी की जायेगी और खरीदी केन्द्र के कर्मचारी किसानों का उपज लेकर विक्रय करने आयेगें जिसका इंतजार कर रहे है। वहीं चना खरीदी प्रारंभ हुए एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी अब तक एक भी किसान अपनी उपज समर्थन मूल्य में विक्रय करने नही पहुंचा है जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि किसानों को उनकी उपज का समर्थन मूल्य (वाजिब दाम) नही मिल पा रहा है। वहीं किसान शासन को चना, सरसों सहित अन्य दलहन फसलों का विक्रय नही करेगें तो बाजार में दालों की कीमतों में वृध्दि होगी जिससे गरीबों के थाली से दाल गायब सी हो सकती है। किसानों ने सरकार से मांग कि है कि चना का समर्थन मूल्य ६००० रूपये प्रति क्विंटल सहित सरसों व गेंहू का भी समर्थन मूल्य बढ़ाना चाहिए ताकि किसान समर्थन मूल्य में सरकार को अपनी उपज विक्रय कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सके।

वाजिम दाम नही मिलने से किसानों में सरकार के प्रति आक्रोश व्याप्त

आपको बता दें कि बालाघाट जिले में अधिकांश किसानों के द्वारा दोनों ही सीजन में धान की फसल लगाई जाती है। लेकिन बहुत से ऐसे किसान भी है जिनके पास सिंचाई की पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण वे कम पानी में बेहतर उपज वाली फसलें रबी सीजन में लगाते है जैसे चना, सरसों, गेंहू सहित अन्य फसलें शामिल है। जिसका उत्पादन लेकर उन्हे कुछ लाभ मिल सके। वर्तमान में शासन के निर्देशानुसार समर्थन मूल्य पर रबी सीजन वर्ष २०२६-२७ के लिये चना गत १५ अप्रैल से प्रारंभ हो चुकी है। लेकिन अब एक भी किसान ने चना विक्रय करने खरीदी केन्द्र कृषि उपज मंडी बकोड़ा नही पहुंच पाया है। जिसका मुख्य कारण माना जा रहा है कि फसल का वाजिम दाम नही मिलना। वहीं किसानों ने बताया कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में खेती करना बहुत महंगा हो गया है, कीटनाशक, उर्वरक सहित अन्य कृषि से संबंधित दवाईयों के दाम आसमान छू रहे है ऐसी स्थिति में किसान के द्वारा जो लागत खेती में लगाई जाती है वह भी निकाल पाना मुश्किल है और मौसम खराब होता है तो किसानों को उसकी भी मार झेलनी पड़ती है। इस तरह से किसानों को हर तरफ से नुकसान का सामना करना पड़ता है। साथ ही यह भी बताया कि सरकार के द्वारा किसानों के हित में कोई फैसला भी नहीं लिया जाता है जिससे उनके आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके, किसानों की आय दुगुनी हो सके। सरकार के द्वारा समर्थन मूल्य पर जो खरीदी की जाती है उसमें भी किसानों को उनकी लागत के अनुरूप दाम नहीं मिल पाता है और उपज को बेचने के बाद भी राशि के लिए कई दिनों तक बैंकों के चक्कर लगाने पड़ते है। इसलिए किसान अपनी उपज चना सहित अन्य फसलों को सरकार को समर्थन मूल्य में विक्रय नही कर रहे है क्योंकि बाजार में समर्थन मूल्य से अधिक दाम में खरीदी की जा रही है इसलिए सरकार से मांग है कि इस बढ़ती महंगाई को देखते हुए किसानों के हित में फैसला लेकर कीटनाशक व उर्वरक के दाम कम करें और किसानों को उनकी लागत के अनुसार समर्थन मूल्य दिया जाये जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।

दूरभाष पर चर्चा में कृषि उपज मंडी बकोड़ा केन्द्र के खरीदी प्रभारी शेषकुमार बिसेन ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार गत १५ अप्रैल से समर्थन मूल्य में चना खरीदी कार्य प्रारंभ कर दी गई है परन्तु अब तक एक भी किसान ने अपनी उपज विक्रय करने नही पहुंचा है। जबकि हम रोज खरीदी केन्द्र खोलकर किसान का इंतजार कर रहे है और चना का समर्थन मूल्य ५८७५ रूपये प्रति क्विंटल है। श्री बिसेन ने बताया कि खरीदी के लिए पुरी तैयारी कर ली गई है और कुछ किसानों से बात भी हुई है जो बुधवार को उपज लेकर आयेगें। क्षेत्र के किसानों से अपील है कि वे समयावधि पर फसल विक्रय कर समर्थन मूल्य का लाभ ले।

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