नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में विशेष न्यायालय ने सख्त फैसला सुनाया है। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश गौतम सिह मरकाम की अदालत ने आरोपी पीयूष पिता अनिल जामरे, 18 वर्ष वार्ड नंबर 8 मरारी मोहल्ला, बालाघाट निवासी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है।
इस मामले में शासन की ओर से पैरवी जिला अभियोजन अधिकारी कपिल कुमार डहेरिया के मार्गदर्शन में विशेष लोक अभियोजक श्रीमती आरती कपले द्वारा की गई।
वर्ष 2024 की घटना-घर में अकेली थी नाबालिग
अभियोजन के अनुसार मामला वर्ष 2024 का है। 16 मार्च 2024 को सुबह करीब 11:30 बजे वार्ड नंबर 7 मरारी मोहल्ला निवासी नाबालिग लड़की के माता-पिता और भाई रिश्तेदारी में आयोजित शादी समारोह में गए हुए थे। उस समय लड़की घर में अकेली थी।
बताया गया कि उसी दिन शाम करीब 4:30 बजे लड़की ने घर में सीलिंग फैन से स्टॉल बांधकर फांसी लगा ली थी। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन घर पहुंचे। सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव बरामद कर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया था।मर्ग जांच के दौरान पुलिस ने साक्षियों के बयान दर्ज किए। मृतका के परिजनों ने पुलिस को बताया कि आरोपी पीयूष जामरे कई दिनों से उनकी पुत्री को परेशान कर रहा था और उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी थी। जिसके कारण उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।शंका के आधार पर पुलिस ने आरोपी पीयूष जामरे को गिरफ्तार किया। शव परीक्षण के दौरान प्राप्त अवयवों को रासायनिक परीक्षण के लिए भेजा गया।जहां से प्राप्त रिपोर्ट और विवेचना में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ धारा 450, 305, 376(3) भारतीय दंड संहिता तथा धारा 3/4 पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
16 गवाहों के बयान के बाद अदालत ने सुनाया फैसला
अभियोजन पक्ष ने मामले को संदेह से परे सिद्ध करने के लिए न्यायालय में 16 साक्षियों के बयान कराए। सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी के विरुद्ध धारा 3/4 पॉक्सो एक्ट तथा धारा 376(3) भारतीय दंड संहिता के तहत लगाए गए आरोप प्रमाणित पाये।मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश गौतम सिंह मरकाम की अदालत ने आरोपी पीयूष जामरे को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
पॉक्सो अदालत ने पीड़िता के माता-पिता को 2 लाख रुपये प्रतिकर देने का दिया आदेश
लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत सुनाए गए फैसले में विशेष न्यायालय ने पीड़ित बालिका के परिजनों को प्रतिकर प्रदान किए जाने को आवश्यक माना। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में पीड़िता लगभग 14 वर्षीय नाबालिग बालिका थी, जिसकी मृत्यु हो चुकी है। अभियुक्त द्वारा उसके साथ गंभीर अपराध किया गया, जिससे उसके माता-पिता और परिवार को गहरा मानसिक आघात एवं असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ा।










































