लंबित भुगतान को लेकर वारासिवनी की आशा कार्यकर्ताओं में आक्रोश

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वारासिवनी। क्षेत्र में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं का धैर्य अब जवाब देने लगा है। पिछले छह महीनों से मानदेय और विभिन्न कार्यों के भुगतान नही होने से नाराज आशा कार्यकर्ता संगठन वारासिवनी ने शासन प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर सीधे देश के प्रधानमंत्री, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को ईमेल के जरिए एक लिखित शिकायत भेजी है। इस शिकायत में उन्होंने परेशान करने का आरोप लगाते हुए जल्द से जल्द लंबित भुगतान जारी करने की गुहार लगाई है।

जनवरी २०२६ से नहीं मिला मानदेय भुखमरी की कगार पर परिवार

शिकायत में आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी निष्ठा के साथ स्वास्थ्य सेवाएं दे रही हैं। इसके बावजूद वर्ष २०२६ के शुरुआती महीने जनवरी से लेकर वर्तमान समय तक उनके द्वारा किए गए विभिन्न कार्यों का भुगतान अटका हुआ है। पिछले छह महीनों से किसी भी आशा कार्यकर्ता को राशि नहीं मिली है। जब भी वे इस संबंध में स्थानीय अधिकारियों से बात करते हैं तो उन्हें हर बार ऊपर से बजट आते ही भुगतान करने का रटा रटाया आश्वासन थमा दिया जाता है। छह महीने से खाली हाथ बैठी कार्यकर्ताओं के सामने अब अपने परिवारों के पालन पोषण और रोजी रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कार्यकर्ताओं का आक्रोश सिर्फ मौजूदा छह महीनों के भुगतान को लेकर नहीं है बल्कि विभाग पर उनका पुराना पैसा भी बकाया है। शिकायत के अनुसार कोरोना काल के दौरान जान जोखिम में डालकर किए गए ऐतिहासिक कार्यों का भुगतान आज तक नहीं किया गया है। इसके अलावा आयुष्मान कार्ड बनाने और पल्स पोलियो जैसे राष्ट्रीय अभियानों में दिन रात एक करने के बाद भी आशा कार्यकर्ताओं को उनकी मेहनत का पैसा नहीं मिला है। पूर्व के इन बकायों और वर्तमान के छह महीनों के लंबित भुगतान के कारण कार्यकर्ताओं में भारी निराशा और आक्रोश व्याप्त है। एक तरफ जहां स्वास्थ्य विभाग आशा कार्यकर्ताओं को उनके हक का पैसा देने में नाकाम साबित हो रहा है वहीं दूसरी तरफ काम के लिए दबाव लगातार बनाया जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भुगतान नही होने के बावजूद उन पर लगातार फील्ड में काम करने का दबाव डाला जाता है। यदि कोई कार्यकर्ता अपनी आर्थिक तंगी का हवाला देती है तो जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा उन्हें कार्य से हटाने या नौकरी से निकालने की सीधी चेतावनी दी जाती है। इस प्रशासनिक तानाशाही और धमकी के कारण कार्यकर्ता भय के साए में काम करने को मजबूर हैं। आशा कार्यकर्ता संगठन वारासिवनी ने शासन को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि यदि उनकी जायज मांगों पर तत्परता से विचार नहीं किया गया और छह माह के लंबित भुगतान सहित पुराने बकायों का जल्द निपटारा नहीं हुआ तो वे अपने अधिकारों के लिए आगे की रणनीति तय करेंगी।

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