नई दिल्ली: मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीति के गलियारों मे बड़ी हलचल शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष और सभी विपक्षी दलों ने सत्र के लिए कमर कस ली है।केंद्र सरकार मॉनसून सत्र में उन बिलों को पास करवाने का पूरा प्रयास करेगी, जिन्हें वो विशेष सत्र में पास करवाने में नाकाम रही थी, वहीं विपक्ष सरकार को घेरने के लिए तरीके खोज रही है। इसी बीच मॉनसून सत्र से पहले द्रविड़ मुनेत्र कषगम की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है।
द्रमुक ने महिला आरक्षण का किया जिक्र
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने रविवार को कहा कि सरकार को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने तथा परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर स्पष्ट फार्मूला सामने रखना चाहिए और यह आरक्षण निचले सदन के वर्तमान संख्याबल के आधार पर दिया जाना चाहिए।सर्वदलीय बैठक में उठाया मुद्दा
पार्टी के वरिष्ठ नेता तिरुची शिवा ने सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में यह मुद्दा उठाया। बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा कि द्रमुक मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या के आधार पर महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में है, लेकिन परिसीमन के मुद्दे पर हम और स्पष्टता चाहते हैं।
केंद्र सरकार से की मांग
शिवा ने कहा कि परिसीमन की कवायद से दक्षिणी राज्यों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए और उन्होंने सरकार से इस संबंध में अधिक स्पष्टता की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर इससे दक्षिणी राज्यों पर असर पड़ता है, तो इसे 25 साल के लिए स्थगित कर दिया जाना चाहिए










































