वारासिवनी। मध्य प्रदेश में सूदखोरों और अवैध कर्जदाताओं के विरुद्ध जारी अभियान के तहत वारासिवनी पुलिस ने एक बड़ी कार्यवाही को अंजाम दिया है। पुलिस ने नगर के लालबर्रा रोड़ स्थित वार्ड नंबर ७ निवासी सुनील पिता पीतमलाल अरोरा को गिरफ्तार कर उसके आवास पर घंटों तलाशी ली। यह पूरी कार्यवाही जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर वारासिवनी, परसवाड़ा, चांगोटोला और बालाघाट पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा की गई। इस दौरान एसडीओपी अभिषेक चौधरी, एसडीओपी परसवाड़ा अरविंद शाह, उपनिरिक्षक पवन यादव, शशांक राणा, आशीष वरकड़े सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
यह हैं मामला
पुलिस को लंबे समय से सुनील अरोरा के खिलाफ अत्यधिक ब्याज वसूली और प्रताडऩा की शिकायतें मिल रही थीं। पीडि़तों का आरोप है कि कर्ज की मूल राशि और मोटा ब्याज चुकाने के बाद भी आरोपी उनके ब्लैंक चेक वापस नहीं कर रहा था। इसके विपरीत आरोपी उन चेकों को बैंक में लगाने की धमकी देकर और अधिक पैसों की मांग कर रहा था। इसमें पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और मध्य प्रदेश ऋ णियों का संरक्षण अधिनियम १९३७ की धारा ३०८(५) जबरन वसूली, धारा ३१६(२) अमानत में ख्यानत और धोखाधड़ी से संबंधित अपराध दर्ज कर नगर में घूम रहे सुनील अरोरा को तत्काल गिरफ्तार कर गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस ने उसके के मकान पर दबिश दी। जांच टीम ने घर के कोने कोने को खंगाला जिसमें विभिन्न प्रकार के दस्तावेज बरामद करने की बात कही जा रही है। हालांकि इस संबंध में पुलिस के द्वारा कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है यह कार्यवाही करीब ५ घंटे से अधिक समय तक चली।
बेनामी संपत्ति होने का संदेह
पुलिस की जांच का एक सिरा लिमन वड़ीवा नामक व्यक्ति से भी जुड़ा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सुनील अरोरा द्वारा खरीदी गई अधिकांश संपत्तियां इसी व्यक्ति के नाम पर दर्ज हैं। पुलिस अब बेनामी संपत्ति के कोण से भी पूछताछ कर रही है।
थाने पहुंच रहे पीडि़त
सुनील अरोरा की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही वारासिवनी थाने में पीडि़तों का तांता लग गया है। आधा दर्जन लोग अपनी आप बीती सुनाने पुलिस के पास पहुंच रहे हैं। पीडि़तों ने पुलिस को बताया कि किस तरह उन्हें मानसिक रूप से प्रताडि़त किया गया और आर्थिक रूप से कंगाल बनाने की कोशिश की गई।
सुनील अरोरा ब्याजी के नाम पर लोगो को सपंत्ति को हड़पता है- सुनील अड़में
शासकीय शिक्षक सुनील अड़मे ने बताया की सुनील अरोरा के पैसे के संबंध में थाने में मेरा आना हुआ था। मैंने सुनील आरोरा से १ लाख रूपये क र्ज लिया था। इसने उससे कई अधिक रुपए मेरे से ले लिए मेरा चेक इसके पास है हमने पूरे रुपए दे दिए हैं परंतु चेक वापस नहीं कर रहा है। करीब ५ वर्ष की यह बात हो गई है हर महीने ८००० रूपये मैं इसे देता हूं १० प्रतिशत ब्याज पर था मुद्द्ल की जो राशि थी उससे ज्यादा रुपए मैं दे चुका हूं। इस मामले की शिकायत हमने पहले कर चुके थे अभी हम थाने में बयान दर्ज करवाने के लिए आए हुए हैं।
सुनील आरोरा से २ लाख रूपये लिये थे जिसका हमने ५ लाख रूपये घर बेचकर दिये है-सपना मेश्राम
श्रीमती सपना मेश्राम ने बताया कि मुझे पता चला कि सुनील अरोरा गिरफ्तार हुआ है। हमसे भी इसने बहुत रुपए लिया है २ लाख रूपये हमने लिए थे इसके हमेे ५ लाख रूपये देना पड़ा यानी ३ लाख रूपये ब्याज दिया। यह व्यक्ति हर महीने हमारे घर और दुकान में रुपए लेने के लिए आता था। हम इतने प्रताडि़त थे कि हमें अपना मकान बेचना पड़ा जिनकी रजिस्ट्री १ जुलाई को हुई और हमने मकान बेचकर इसे पूरा पैसा दिया। परंतु इसके पास मेरा और मेरे पति का चेक रखा हुआ था वह मांगने पर यह और रुपए मांगने लगा। पुराना ब्याज बचा है बोलकर अब हमने वह घर द्वार सब बेच दिया और इसे रुपए कहां से लाकर देंगे। इसने जब चेक वापस नहीं किया उल्टा हमें नोटिस भेजा की रुपए दो अभी पुलिस अधिकारी से चर्चा हुई। उन्होंने आवेदन देने के लिए कहा है मेरे जैसे बहुत से लोग हैं ऐसे भी कुछ लोग हैं जिनकी जमीन इसने रख लिया है। जरूर वाले लोगों को यह ढूंढता था अब यह हम पर दबाव बना रहा था।
मैं सुनील अरोरा से बहुत परेशान हूं जो मुझे न्याय चाहियें- खेमेंद्र धार्मिक
खेमेन्द्र धार्मिक ने बताया कि जानकारी मिली कि सुनील अरोरा गिरफ्तार हुआ है तो मैं भी अपनी शिकायत लेकर थाना आया। वर्ष २०१३ में मैं शादी किया था उस समय मुझे रुपए की आवश्यकता थी तो इन्होंने मुझे मदद की कभी १० कभी ५ हजार रुपए करके करीब ६५००० रूपये इन्होंने दिए। वर्ष २०१३ से प्रतिदिन ३०० रूपये रोज और महीने का ९००० रुपए मैं दे रहा था। मेरा चेक घर के दस्तावेज सुनील अरोरा के पास पड़े हैं अभी तक इसने नहीं दिया है और ना ही मेरा कर्जा स्पष्ट किया है। मैं इससे बहुत प्रताडि़त हूं बड़ा भाई जैसा लगता था पर यह हर समय मुझे प्रताडि़त करता था। मेरे रुपए देने के दो व्यक्ति गवाह है आज जब यह सार्वजनिक रूप से हो रहा है तो मैं भी शिकायत करने के लिए आया हूं। २०१३ से आज २०२६ हो गया है कितना पैसा हम इसे देंगे एक चेक का हमें डर है जो शासन ने क्यों बनाया पता नहीं हमारे भी बीवी बच्चे हैं।










































