बरसात में चौकी बनी जलाशय, छत टपकी तो कमरे में घुसा पानी
सीलन और करंट के साये में ड्यूटी निभाने को मजबूर पुलिसकर्मी
बालाघाट।
जिले में पिछले 25 वर्षों के दौरान पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने के नाम पर आधा दर्जन से अधिक नई पुलिस चौकियां खोली गईं। कई चौकियों को थानों का दर्जा मिला और उनके लिए आधुनिक भवन भी तैयार कर दिए गए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिले की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मानी जाने वाली जिला अस्पताल पुलिस चौकी आज भी एक स्थायी भवन के लिए तरस रही है।करीब डेढ़ दशक से यह पुलिस चौकी जिला अस्पताल परिसर स्थित महिला विश्रांति भवन के एक जर्जर कमरे में संचालित हो रही है। हर बरसात के साथ इस चौकी की बदहाली और सरकारी दावों की पोल खुल जाती है। छत से टपकता पानी, सीलन से भरी दीवारें और कमरे के भीतर भरता बारिश का पानी यहां तैनात पुलिसकर्मियों की रोजमर्रा की मजबूरी बन चुका है।28 जुलाई की रात करीब 9 बजे हुई तेज बारिश ने एक बार फिर चौकी की बदहाल तस्वीर सामने ला दी। कुछ ही देर की बारिश में पानी सीधे चौकी के भीतर घुस गया। पुलिसकर्मी वर्दी में ही कमरे में भरे पानी को बाहर निकालते नजर आए। जिस स्थान से कानून-व्यवस्था संचालित होनी चाहिए, वहां पुलिसकर्मी फाइलों और जरूरी दस्तावेजों को बचाने की जद्दोजहद करते दिखाई दिए।स्थिति केवल जलभराव तक सीमित नहीं है। चौकी के सामने हर बारिश में पानी भर जाता है।जिससे अस्पताल परिसर की गंदगी भी वहीं जमा हो जाती है। दुर्गंध, गंदगी और जलभराव के बीच पुलिसकर्मियों को अपनी ड्यूटी निभानी पड़ती है।सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि लगातार सीलन के कारण कुछ समय पहले चौकी की दीवारों और विद्युत व्यवस्था में करंट उतरने लगा था। बिजली का स्विच ऑन करते समय कई पुलिसकर्मियों को करंट के झटके भी लगे। बाद में विद्युत बोर्ड की मरम्मत कराई गई। लेकिन भवन की मूल समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। हर बारिश में छत टपकती है और पानी कमरे के भीतर भर जाता है।यह समस्या किसी एक मौसम या एक वर्ष की नहीं बल्कि वर्षों पुरानी है। कई बार इस ओर ध्यान आकर्षित किए जाने के बावजूद न अस्पताल प्रबंधन ने स्थायी समाधान निकाला और न ही पुलिस विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस दिशा में ठोस पहल की।विडंबना यह है कि जिस पुलिस चौकी में अस्पताल से जुड़े हादसों, दुर्घटनाओं, मेडिको लीगल मामलों और संवेदनशील प्रकरणों की कार्रवाई होती है वही चौकी आज खुद बदहाल व्यवस्था की शिकार बनी हुई है।अब बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में नई पुलिस चौकियों और थानों के लिए भवन बनाए जा सकते हैं।तब जिला अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण जगह पर संचालित इस पुलिस चौकी को आखिर कब अपना सुरक्षित और स्थायी भवन मिलेगा या फिर पुलिसकर्मी हर बरसात में इसी तरह पानी, सीलन और करंट के बीच अपनी जिम्मेदारियां निभाने को मजबूर रहेंगे।









































