Operation Lal Masjid Pakistan: जुलाई 2007 का ‘ऑपरेशन लाल मस्जिद’ पाकिस्तान के इतिहास का वो पन्ना है, जिसने न केवल देश की आंतरिक सुरक्षा को हिलाकर रख दिया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के समीकरण भी बदल दिए थे। इस्लामाबाद के बीचों-बीच स्थित लाल मस्जिद से, जहां मौलवियों के कट्टरपंथी एजेंडे ने सरकार को खुली चुनौती दी थी। उसके बाद चीन का इसमें दखल हुए जानें क्यों…
इस ऑपरेशन ने पाकिस्तान के इतिहास में एक बड़ा मोड़ ला दिया था। इसके बाद से पाकिस्तान में चरमपंथियों के साथ सरकार के रिश्ते काफी बिगड़ गए और इसी घटना के बाद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का उदय हुआ।
क्या था ‘ऑपरेशन लाल मस्जिद’ (What Was Operation Lal Masjid)
जुलाई 2007 में हुआ ‘ऑपरेशन लाल मस्जिद’ (जिसे ‘ऑपरेशन साइलेंस’ भी कहा जाता है) पाकिस्तान के इतिहास की सबसे विवादास्पद और महत्वपूर्ण सैन्य घटनाओं में से एक है। यह ऑपरेशन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित लाल मस्जिद और उससे जुड़ी ‘जामिया हफ़्सा’ मदरसा में कट्टरपंथी चरमपंथियों के खिलाफ चलाया गया था। इस्लामाबाद के बीचों-बीच स्थित लाल मस्जिद से, जहां मौलवियों के कट्टरपंथी एजेंडे ने सरकार को खुली चुनौती दी थी। लेकिन, पाकिस्तान की सत्ता की नींद तब उड़ी जब मस्जिद के छात्रों ने 7 चीनी नागरिकों को बंधक बना लिया था।
क्या था घटनाक्रम (What Was Background)
इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के मौलाना अब्दुल अजीज और उनके समर्थकों नेइस्लामाबाद में अपनी एक समानांतर शासन व्यवस्था (शरिया कानून) लागू करने की कोशिश की थी। उन्होंने मस्जिद के परिसर को हथियारबंद चरमपंथियों का गढ़ बना लिया था और सरकार को चुनौती दी थी। लाल मस्जिद का संचालन दो भाई-मौलाना अब्दुल अजीज और अब्दुल रशीद गाजी करते थे। पिछले 18 महीनों से, ये मौलवी और उनके समर्थक पाकिस्तान सरकार के लिए सिरदर्द बने हुए थे। वे पूरे पाकिस्तान में कट्टरपंथी ‘शरिया कानून’ लागू करने की मांग कर रहे थे और खुलेआम सरकार को उखाड़ फेंकने की धमकी देते थे।
‘नैतिकता’ के नाम पर कई चीजों को बनाया निशाना बनाया
लाल मस्जिद के छात्रों द्वारा चलाए गए अभियान में ‘नैतिकता’ के नाम पर कई चीजों को निशाना बनाया गया था। वे इस्लामाबाद में अपनी एक ‘समानांतर न्याय व्यवस्था’ लागू करने की कोशिश कर रहे थे।
किन चीजों पर रोक लगाई (Moral Policing)-
लाल मस्जिद के चरमपंथियों ने इस्लामाबाद के कई इलाकों में अपनी ‘शरिया पुलिस’ तैनात कर दी थी और निम्नलिखित गतिविधियों पर पाबंदी लगाने का फरमान जारी किया था-
– मसाज पार्लर और ब्यूटी सैलून-उन्होंने इन जगहों को ‘अनैतिक’ और ‘इस्लाम के खिलाफ’ बताते हुए बंद करने का आदेश दिया।
– वीडियो और सीडी की दुकानें-उन्होंने ऐसी दुकानों को चेतावनी दी कि वे फिल्में और गाने बेचना बंद कर दें, क्योंकि उनका मानना था कि ये चीजें समाज को ‘भ्रष्ट’ कर रही हैं।
– संगीत और मनोरंजन- सार्वजनिक स्थानों पर संगीत बजाने या मनोरंजन के कार्यक्रमों पर उन्होंने रोक लगाने की धमकी दी।
– महिलाओं का काम करना-उन्होंने कुछ क्षेत्रों में कामकाजी महिलाओं को डराना-धमकाना शुरू कर दिया था।










































