बूढ़ी शराब दुकान आंदोलन में सांसद भारती पारधी नाराज, महिला कार्यकर्ता को लगाई फटकार,

0

बूढ़ी शराब दुकान के स्थान परिवर्तन को लेकर चल रहे महिलाओं के आंदोलन के दौरान उस समय माहौल गर्मा गया, जब सांसद भारती पारधी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं। यहां उन्होंने पहले आंदोलन कर रही महिलाओं का समर्थन करते हुए शराब दुकान हटाने की मांग को उचित बताया, लेकिन इसी दौरान एक महिला कार्यकर्ता पर नाराज हो गईं। जानकारी के अनुसार सांसद भारती पारधी ने संबंधित महिला से कहा कि बीते दिनों वह अन्य महिलाओं के साथ भाजपा पार्टी खिलाफ नारेबाजी कर रही थीं, जो उचित नहीं है। सांसद ने कहा कि अन्य महिलाएं यदि नाराजगी में नारे लगाती हैं तो बात अलग है, लेकिन पार्टी से जुड़ी कार्यकर्ता द्वारा इस प्रकार की नारेबाजी करना गलत है। दरअसल कुछ दिन पहले आंदोलन के दौरान महिलाओं ने सांसद भारती पारधी को मौके पर बुलाने की मांग को लेकर उनके खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए थे। इसी बात को लेकर सांसद ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने के बाद संबंधित महिला पर नाराजगी जाहिर की। बताया जा रहा है कि सांसद ने महिला से साफ तौर पर कहा कि इस प्रकार पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होना ठीक नहीं है और उन्होंने कुछ समय तक उनसे बात करने से भी इनकार कर दिया। हालांकि बाद में आंदोलन स्थल पर मौजूद अन्य महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने माहौल शांत कराया। सांसद ने आंदोलनकारी महिलाओं को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को संबंधित विभाग और शासन स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। बूढ़ी शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर महिलाओं का आंदोलन लगातार जारी है और क्षेत्र में यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है।

बालाघाट शहर के वार्ड क्रमांक 12 स्थित बूढ़ी शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर महिलाओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। बीते लगभग एक महीने से महिलाएं शराब दुकान के सामने धरना देकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। खास बात यह है कि महिलाएं हर दिन अलग-अलग तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रही हैं, जिसके कारण यह प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। कभी महिलाएं गांधीगिरी का रास्ता अपनाती हैं तो कभी शराब दुकान के सामने झाड़ू लगाकर और सफाई अभियान चलाकर अपना विरोध जताती दिखाई देती हैं। हाल ही में महिलाओं ने आंदोलन स्थल पर मदर्स डे भी मनाया। महिलाओं ने रात के समय धरना स्थल पर केक काटकर मदर्स डे सेलिब्रेट किया और शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर अपनी एकजुटता दिखाई। वहीं कई बार जब प्रदर्शन में कम महिलाएं मौजूद रहती हैं और माहौल शांत हो जाता है तो महिलाएं वहीं कुर्सी दौड़ जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित कर समय बिताती नजर आती हैं। महिलाओं का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और जब तक शराब दुकान वहां से नहीं हटाई जाएगी, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। बीते कुछ दिनों में इस आंदोलन को पक्ष और विपक्ष दोनों ही दलों के नेताओं का समर्थन मिलता दिखाई दिया, लेकिन महिलाओं के बीच यह चर्चा थी कि अभी तक सांसद भारती पारधी आंदोलन स्थल पर नहीं पहुंची थीं। महिलाओं का कहना था कि पूर्व में वार्ड क्रमांक 25 में भी महिलाओं ने सांसद के खिलाफ नारेबाजी की थी, जिसके बाद सांसद वहां पहुंची थीं और कुछ दिनों बाद शराब दुकान हट गई थी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हाल ही में वार्ड क्रमांक 12 की महिलाओं ने भी सांसद भारती पारधी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुर्दाबाद के नारे लगाए थे। इसके बाद सांसद भारती पारधी 11 मई की शाम महिलाओं के प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं। यहां पहुंचने के बाद सांसद एक महिला पर नाराज होती दिखाई दीं। सांसद का कहना था कि प्रदर्शन में शामिल एक महिला भाजपा की कार्यकर्ता है और उसके द्वारा पार्टी के खिलाफ नारेबाजी करना उचित नहीं है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि बाकी महिलाएं यदि विरोध में नारेबाजी करती हैं तो वह अलग बात है, लेकिन पार्टी कार्यकर्ता होकर पार्टी के खिलाफ नारे लगाना सही नहीं है। बातचीत के दौरान सांसद ने उस महिला से यह तक कह दिया कि अब उनसे वह बात नहीं करना चाहती । वहीं सांसद के वहां से जाने के बाद संबंधित महिला ने मीडिया के सामने अपनी सफाई दी। महिला का कहना था कि उन्होंने भाजपा पार्टी के खिलाफ किसी प्रकार की नारेबाजी नहीं की है, बल्कि उन्होंने महिलाओं के साथ केवल सांसद के खिलाफ नारे लगाए थे। महिला ने कहा कि सबसे पहले उनके लिए उनका वार्ड और मोहल्ला है, उसके बाद पार्टी है। उनका कहना था कि वे क्षेत्र की महिलाओं के साथ शराब दुकान हटाने की मांग कर रही हैं और उसी भावना से आंदोलन में शामिल हैं। महिला ने यह भी कहा कि सांसद द्वारा उन पर नाराजगी जाहिर करने के पीछे मुख्य कारण उनके खिलाफ हुई नारेबाजी थी, न कि पार्टी विरोधी गतिविधि। हालांकि सांसद भारती पारधी ने महिलाओं को आश्वासन दिया है कि वे प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा कर जल्द ही इस मामले में समाधान निकालने का प्रयास करेंगी और शराब दुकान हटाने को लेकर संबंधित विभाग से बात करेंगी।

70 से 80 लाक रुपए का हो गया है नुकसान

इधर लगभग एक महीने से जारी महिलाओं के प्रदर्शन का असर शराब दुकान के कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। शराब दुकान से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि आंदोलन के चलते दुकान को अब तक लगभग 70 से 80 लाख रुपए तक का नुकसान हो चुका है। कर्मचारियों के अनुसार सामान्य दिनों में दुकान का प्रतिदिन लगभग ढाई से तीन लाख रुपए तक का कारोबार होता था, लेकिन प्रदर्शन के बाद बिक्री पर बड़ा असर पड़ा है। अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि इस भारी राजस्व नुकसान की भरपाई कौन करेगा। क्योंकि दुकान लाइसेंसधारी के माध्यम से संचालित की जा रही है और उन्हें विभाग को निर्धारित राजस्व भी जमा करना होता है। ऐसे में लगातार हो रहे नुकसान को लेकर लाइसेंसधारी भी संबंधित विभाग और अधिकारियों से चर्चा कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो नियमों के अनुसार यह आर्थिक नुकसान अंततः लाइसेंसधारी को ही वहन करना पड़ सकता है। हालांकि अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में किसी प्रकार की राहत देता है या फिर पूरी राशि की वसूली नियमानुसार की जाएगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here