इस्लामाबाद: संयुक्त अरब अमीरत (यूएई) की ईरान और पाकिस्तान से एक और मोर्चे पर तनातनी होती दिख रही है। दोनों देशों ने यूएई पर आरोप लगाया है कि वह ईरान के क्षेत्रीय व्यापार गलियारा बनने की कोशिश में रुकावट डाल रहा है। ईरानी और पाकिस्तानी व्यापारिक हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली निजी द्विपक्षीय व्यापार संस्था ‘ ईरान-पाकिस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स ‘ ने बयान जारी करते हुए यूएई पर कई आरोप लगाए हैं।
ड्रॉप साइट न्यूज के मुताबिक, ईरान-पाकिस्तान चैंबर ने कही है कि यूएई की ओर से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) में ईरान के शामिल होने में सक्रिय रूप से रुकावट डाली जा रही है। ईरानी मीडिया मे कहा है कि यूएई को डर है कि ग्वादर उसके लिए आर्थिक चुनौती बन सकता है। ऐसे में वह ग्वादर बंदरगाह पर ईरान को जाने से रोकना चाहता है।ईरान CPEC से कैसे जुड़ेगा
साल 2015 में शुरू किए गया CPEC करीब 62 अरब डॉलर का चीनी-पाकिस्तानी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। यह पाकिस्तान के बलूचिस्तान, पंजाब, सिंध और खैबर को अरब सागर पर स्थित ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है। ईरान इस गलियारे से जुड़ने के लिए चाबहार, जाहिदान और मीरजावेह के बीच रेल कनेक्टिविटी बना रहा है। यह रूट ईरान को चीन, मध्य एशिया और काकेशस के बीच व्यापार के रणनीतिक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
ईरान-पाकिस्तान चैंबर का कहना है कि अगर ग्वादर से ईरान जुड़ जाता है तो दुबई के जेबेल अली पोर्ट की वैश्विक अहमियत कम हो जाएगी। ग्वादर पोर्ट और जेबेल अली पोर्ट के बीच मुकाबला देखा जाता रहा है। पाकिस्तान और चीन की कोशिश ईरान के साथ ग्वादर को जेबेल की टक्कर का अंतर्राष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट और लॉजिस्टिक हब बनाने की है।










































