इस्लामाबाद: बलूचिस्तान ने पाकिस्तान से ‘आजादी’ का ऐलान भले कर दिया है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वो एक नया देश बन गया है। अपने आप कोई नया देश बन भी नहीं जाता। बलूचिस्तान ने कहा है कि उसे अब ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ के नाम से पहचाना जाए। अलगाववादियों का दावा है कि उन्होंने आजादी का ऐलान कर दिया है और इलाके के बड़े हिस्से पर उनका कब्जा है। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और बलूचिस्तान का प्रशासन अभी भी पाकिस्तान के ही हाथ में है।कुछ देर के लिए अगर मान भी लिया जाए की बलूचों के आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है फिर भी आजादी की घोषणा करना और उस घोषणा को एक मान्यता प्राप्त संप्रभु राष्ट्र में बदलना पूरी तरह से अलग चुनौती होगी। अंतर्राष्ट्रीय कानून में किसी देश के दर्जे यानि स्टेटहुड के लिए कुछ सिद्धांत तय किए गए हैं लेकिन उसे मान्यता मिलने में कानूनी नियमों के साथ-साथ जियो पॉलिटिक्स की भी उतनी ही बड़ी भूमिका होती है।
इतिहास टटोलने से पता चलता है कि पहले भी कई इलाकों ने खुद को आजाद घोषित किया है। लेकिन उनमें से बहुत कम को ही अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिल पाई है। फर्क इस बात में है कि क्या यह देश यह दिखा सकता है कि वह एक आजाद देश के तौर पर काम करता है और क्या दूसरे देश उसे पहचानने के लिए तैयार हैं। बलूचिस्तान के लिए दोनों ही शर्तें काफी मुश्किल हैं।










































