‘नीम हकीम खतरे जान’ कमाई भी घट जाती है, बात हो रही है स्टेनलेस स्टील फैब्रिकेटर्स की

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सनई दिल्ली: भारत में पिछले कुछ सालों के दौरान जिस हिसाब से इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स की संख्या बढ़ रही है, उस हिसाब से उन्हें नौकरी मिल नहीं रही है। कुछ ग्रेजुएट्स को छोड़ दें तो शेष लोग अपनी श्रेणी के मुकाबले कम वेतन पर काम कर रहे हैं। वजह है ढंग से स्किल्ड (Skilled) नहीं होना। यही हालत आईटीआई (ITI) या अन्य स्किल ट्रेनिंग (Skill Training) लिए लोगों की भी है। लेकिन स्टेनलेस स्टील फैब्रिकेशन सेक्टर की एक रिपोर्ट में बताया गया है इस सेक्टर में काम करने वाले हर तीन में से एक व्यक्ति ही अच्छी तरह से प्रशिक्षित हैं। साथ ही बताया गया है कि जो स्किल्ड हैं, वे दूसरों के मुकाबले 14 फीसदी अधिक कमाई कर रहे हैं।

पीडब्ल्यूसी ने जारी की रिपोर्ट

मल्टीनेशनल प्रोफेशन सर्विसेज नेटवर्क प्राइसवाटरहाउस कूपर्स (PWC) ने हाल ही में Training Need Assessment (TNA) रिपोर्ट जारी की है। इसे भारत का पहला स्किल्ड वर्कफोस रिपेार्ट बताया जा रहा है जिसे जिंदल स्टनेलेस ने प्रायोजित किया है। इसमें बताया गया है कि भारत में भले ही ढेरों लोग स्टेनलेस स्टील फैब्रिकेशन सेक्टर में काम कर रहे हैं। लेकिन उन सभी को ढंग से प्रशिक्षण नहीं मिला है। स्थिति यह है कि हर तीन में से सिर्फ एक ही स्किल्ड है। इस अध्ययन में 1,904 लोगों को शामिल किया गया, जिनमें 629 फैब्रिकेटर, 575 कर्मचारी, 250 नियोक्ता और 450 छात्र शामिल थे। यह अध्ययन नौ राज्यों – गुजरात, हरियाणा, तमिलनाडु, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और झारखंड – में किया गया। इसे स्टेनलेस स्टील क्षेत्र के कर्मचारियों पर अब तक का सबसे व्यापक भौगोलिक अध्ययन बताया जा रहा है।

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