नई दिल्ली: सरकार ने ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर लगाने का फैसला किया है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होगी। यूपीआई ने अगस्त 2026 में कुल ₹29.9 लाख करोड़ राशि के 2,451 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए थे। इससे हालांकि थर्ड-पार्टी पेमेंट ऐप्स को कम हिस्सा मिलेगा, लेकिन MDR से उन्हें सबसे ज्यादा फायदा होगा क्योंकि उनका बिजनेस मॉडल सस्टेनेबल हो जाएगा और उन्हें कमाई के दूसरे जरिया नहीं खोजने पड़ेंगे। इसका सबसे ज्यादा फायदा फोनपे और गूगलपे को होगा।
यूपीआई में फोनपे का मार्केट शेयर सबसे ज्यादा 48.9 फीसदी है जबकि गूगल पे की हिस्सेदारी 37.7 फीसदी है। पेटीएम की हिस्सेदारी 8.3 फीसदी, क्रेड की 1 फीसदी, ऐमजॉन पे की 0.5 फीसदी और अन्य की 3.6 फीसदी है। यानी फोनपे और गूगल पे की कुल हिस्सेदारी 86.6 फीसदी है। फोनपे में अमेरिका की दिग्गज कंपनी वालमार्ट की हिस्सेदारी 71.77 परसेंट है जबकि गूगल पे का मालिकाना हक गूगल और इसकी मूल कंपनी अल्फाबेट इंक के पास है।
कैसे बंटेगी फीस?
हर ₹2,000 के पेमेंट पर मर्चेंट ₹8 फीस देगा। इसमें से इश्यू करने वाले बैंक (जिसके अकाउंट से पैसे दिए जाएंगे) को फीस के तौर पर ₹3.2 मिलेंगे जबकि पेमेंट पाने वाले बैंक (एक्वायरिंग बैंक) को ₹2.4 मिलेंगे। बाकी बचे ₹2.4 में से थर्ड-पार्टी ऐप PhonePe, Google Pay, Paytm, Amazon Pay या WhatsApp को ₹1.6 मिलेंगे और ऐप के लिए प्रोसेसिंग करने वाले बैंक को 80 पैसे मिलेंगे।
जिन बैंकों के पास सबसे ज्यादा बैंक अकाउंट हैं, उन्हें सबसे ज्यादा फायदा होगा क्योंकि उन्हें फीस का बड़ा हिस्सा मिलेगा। सेविंग्स अकाउंट के लिए डेबिट कार्ड के इस्तेमाल के आधार पर एसबीआई 25% मार्केट शेयर के साथ सबसे आगे है। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा (8%), HDFC बैंक (6.2%), केनरा बैंक (5.9%) और यूनियन बैंक (5.6%) का नंबर आता है।





































