पर्सनल लोन जल्दी पैसे देता है, लेकिन लेने से पहले ब्याज, ईएमआई, फीस और दूसरे चार्ज जरूर समझ लें, ताकि बाद में कर्ज का बोझ न बढ़े।त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है। दुर्गापूजा से लेकर दिवाली तक लोग घर, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और दूसरी जरूरतों की जमकर खरीदारी करते हैं। कई लोग इन खर्चों को पूरा करने के लिए पर्सनल लोन का सहारा भी लेते हैं। अगर आप भी बैंक से पर्सनल लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला न करें। ब्याज के अलावा प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज और अन्य शर्तों को समझना भी जरूरी है। आइए जानते हैं पर्सनल लोन लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
1. ब्याज दर की तुलना जरूर करें
पर्सनल लोन लेने से पहले अलग-अलग बैंकों और लोन कंपनियों की ब्याज दरों की तुलना करें। सिर्फ मासिक ईएमआई देखकर फैसला न करें, बल्कि यह भी देखें कि पूरी लोन अवधि में आपको कुल कितना ब्याज चुकाना पड़ेगा। साथ ही यह जरूर पता करें कि ब्याज दर फिक्स्ड है या फ्लोटिंग। फिक्स्ड रेट में ब्याज दर स्थिर रहती है, जबकि फ्लोटिंग रेट में बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदलाव हो सकता है।
2. छिपे हुए चार्ज को नजरअंदाज न करें
लोन लेते समय सिर्फ ब्याज ही खर्च नहीं होता। बैंक प्रोसेसिंग फीस, प्रशासनिक शुल्क और दूसरे चार्ज भी ले सकते हैं। प्रोसेसिंग फीस कई मामलों में लोन राशि का करीब 1 से 3% तक हो सकती है। इसके अलावा यह भी पता करें कि अगर आप समय से पहले पूरा लोन चुका देते हैं तो कोई प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज लगेगा या नहीं। ईएमआई समय पर नहीं चुकाने पर लगने वाली लेट फीस और अन्य पेनल्टी की जानकारी भी पहले ले लें।3. क्रेडिट स्कोर और पात्रता जांचें
पर्सनल लोन की ब्याज दर तय करने में क्रेडिट स्कोर की अहम भूमिका होती है। आमतौर पर 750 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर बेहतर ब्याज दर पाने में मदद कर सकता है। हालांकि यह बैंक की नीतियों और आपकी पूरी प्रोफाइल पर निर्भर करता है। लोन के लिए आवेदन करने से पहले अपनी पात्रता जरूर जांच लें। बैंक आय, नौकरी या कारोबार की स्थिति और मौजूदा कर्ज जैसी चीजों को भी देखते हैं। पहचान और पते के प्रमाण के साथ सैलरी स्लिप या आईटीआर जैसे दस्तावेज तैयार रखें।
4. ईएमआई अपनी आय के हिसाब से तय करें
लोन की ईएमआई इतनी होनी चाहिए कि हर महीने का बजट प्रभावित न हो। सामान्य तौर पर कुल मासिक कर्ज भुगतान को आपकी नेट मासिक आय के 40-50% से ज्यादा न जाने देना बेहतर माना जाता है। लोन की अवधि चुनते समय भी सावधानी बरतें। छोटी अवधि में ईएमआई ज्यादा होगी, लेकिन कुल ब्याज कम देना पड़ेगा। वहीं लंबी अवधि में ईएमआई कम हो सकती है, लेकिन पूरे लोन पर ब्याज का बोझ बढ़ सकता है।
5. लोन लेने से पहले दूसरे विकल्प भी देखें
पर्सनल लोन लेने से पहले यह भी जांच लें कि आपकी जरूरत के लिए कोई सस्ता विकल्प उपलब्ध है या नहीं। खासतौर पर अगर आप क्रेडिट कार्ड से खर्च करने की सोच रहे हैं तो रिवॉल्विंग क्रेडिट पर लगने वाले ब्याज की तुलना पर्सनल लोन से जरूर करें। त्योहारों की खरीदारी या दूसरी जरूरतों के लिए सिर्फ इसलिए बड़ा लोन न लें क्योंकि बैंक आसानी से उपलब्ध करा रहा है। लोन की वास्तविक लागत, ईएमआई और अपनी चुकाने की क्षमता को समझने के बाद ही फैसला लेना बेहतर है।










































