बंजारा समाज ने पारंपरिक ‘लहंगी’ और ‘डांडेयर’ उत्सव का आयोजन किया। इस आयोजन में राजस्थान और मध्य प्रदेश के बंजारा समाज के लोग शामिल हुए। बुजुर्गों ने नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत संजोने का मंत्र दिया। उन्होंने आधुनिकता के साथ अपनी लोक संस्कृति को जीवित रखने पर जोर दिया।गुना: आधुनिकता और डिजिटल दौर में जहां नई पीढ़ी का जुड़ाव तेजी से मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया से बढ़ रहा है, वहीं मध्यप्रदेश के गुना जिले में बंजारा समाज ने अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की अनूठी मिसाल पेश की है। सावन के पवित्र महीने में बमोरी ब्लॉक के ग्राम चक खड़गपुर में पारंपरिक ‘लहंगी’ और ‘डांडेयर’ उत्सव का भव्य आयोजन किया गया।यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि बंजारा समाज की एकता, परंपरा और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश भी बन गया। खास बात यह रही कि आयोजन में बुजुर्गों के साथ युवा और बच्चे भी पूरे उत्साह से शामिल हुए।
सावन की फुहारों के बीच जुटा बंजारा समाज
सावन की फुहारों के बीच आयोजित इस सांस्कृतिक संगम में गुना जिले के अलावा राजस्थान के कोटा और मध्यप्रदेश के बीना अंचल से भी बंजारा समाज के सैकड़ों लोग पहुंचे। चक खड़गपुर का विशाल प्रांगण पारंपरिक रंगों और लोक संस्कृति से सराबोर नजर आया। समाज के बुजुर्गों से लेकर युवा और बच्चे तक पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। माहौल ऐसा था मानो आधुनिक दौर के बीच गांव में बंजारा समाज की सदियों पुरानी लोक परंपरा फिर से जीवंत हो उठी हो।









































