Iran-US युद्ध के बाद पहली बार होगी पीएम मोदी और पेजेश्कियान की होगी मुलाकात, क्या रहेगा ट्रंप का रुख?

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इससे पहले दोनों शीर्ष नेताओं की आखिरी आमने-सामने मुलाकात अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें रहेंगी।Modi-Pezeshkian Meeting: किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच द्विपक्षीय वार्ता हो सकती है। मध्य पूर्व में फरवरी 2026 में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच भड़के सैन्य संघर्ष के बाद दोनों नेताओं की यह पहली व्यक्तिगत मुलाकात होगी। देखना ये होगा कि इस मुलाकात पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का क्या रुख रहता है। अमेरिका और ईरान के बीच भले ही युद्ध थम गया हो, लेकिन आग बरकरार है और एक दूसरे को खत्म करने का इरादा खत्म नहीं हुआ है।

अक्टूबर 2024 में कजान में हुई थी मुलाकात

इससे पहले दोनों शीर्ष नेताओं की आखिरी आमने-सामने मुलाकात अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। संवाद और कूटनीति पर जोर: क्षेत्रीय सैन्य तनाव के बाद पीएम मोदी इस वार्ता में भारत के उस रुख को दोहराएंगे जिसमें सभी विवादों का समाधान युद्ध के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने की अपील की गई है।

ऊर्जा और चाबहार पोर्ट: अमेरिका द्वारा चाबहार बंदरगाह से जुड़ी प्रतिबंध छूट समाप्त होने के कारण द्विपक्षीय व्यापार और कनेक्टिविटी पर असर पड़ा है। दोनों नेता चाबहार पोर्ट परियोजना की समीक्षा और सुचारू ऊर्जा आपूर्ति पर चर्चा कर सकते हैंभारतीय नागरिकों की सुरक्षा: मध्य पूर्व के संघर्षग्रस्त इलाकों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही भारत की प्राथमिकता रहेगी।

संतुलन साधने की रणनीति

भारत एक तरफ खाड़ी देशों (GCC) के साथ सुरक्षा चिंताओं पर संपर्क में है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बनाए रखते हुए एक संतुलन साध रहा है। मुलाकात की पृष्ठभूमिअक्टूबर 2024 (कजान) की मुलाकात के बाद हालांकि दोनों नेताओं ने टेलीफोन पर कई बार बातचीत की, लेकिन सैन्य संघर्ष के बाद यह उनकी पहली औपचारिक टेबल-टॉक होगी। तेहरान और बिश्केक के कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, यह बैठक भारत और ईरान दोनों के लिए अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को नए सिरे से तय करने का एक प्रमुख अवसर है।

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