Kuno National Park: देसी और विदेशी चीते बन गए हैं ‘ब्रो’,चार साल में बने उनके दो घर; कूनो जंगल में अब भारतीय चीतों की है धाक

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Cheetah Project Fourth Anniversary: मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट के चार साल पूरे हो गए हैं। भारत में अब चीतों की संख्या 52 पहुंच गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि देसी और विदेशी चीते भी भाइयों की तरह रहने लगे हैं। अब कूनो में भारत में जन्मे चीतों की संख्या अधिक है।श्योपुर: भारत में चीता परियोजना के चार साल हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाकर 8 चीते 2022 में छोड़े गए थे। अब चीतों की आबादी भारत में 52 हो गई है। कूनो के जंगल में भारत में जन्मे चीतों की धाक है। प्रोजेक्ट चीता की सबसे बड़ी सफलता यह है कि देसी और विदेशी चीते अब भाइयों जैसा रहने लगे हैं।भारत में जन्मे हैं 32 चीते

दरअसल, भारत में चीता प्रोजेक्ट ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। इसके बावजूद सफलता की ओर अग्रसर है। शुरुआती दिनों में चीतों की मौत भी हुई, जिसके बाद सवाल उठने लगे थे। अब इन सारी चीजों को धत्ता बताते हुए चीता प्रोजेक्ट सफलता की ओर अग्रसर है। अभी भारत में कुल चीतों की संख्या 52 है, इनमें 32 का जन्म मध्य प्रदेश में हुआ है।

सबसे पहले नामीबिया से लाए गए थे चीते

17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से आए आठ चीतों को कूनो स्थित उनके बाड़े में छोड़ा था। कूनो नेशनल पार्क एमपी और राजस्थान की सीमा पर स्थित है। इसी साल 21 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी चीता प्रोजेक्ट को देखने कूनो पहुंची थीं।चार साल में चीतों के बने दो घर

मध्य प्रदेश से चीते ऐसे तो यूपी और राजस्थान भी पहुंच जा रहे हैं। लेकिन चार सालों में आधिकारिक रूप से इनके रहने के लिए दो घर बने हैं। एक कूनो नेशनल पार्क है और दूसरा गांधी सागर अभ्यारण है। श्योपुर जिले स्थित कूनो में अभी 49 चीते हैं और गांधी सागर अभ्यारण में 3 चीते हैं। हालांकि लंबे समय से गुजरात में भी इनका नया घर बनाने की तैयारी चल रही है।

ब्रो बन गए हैं देसी और विदेशी चीते

वहीं, चीतों की सबसे अच्छी बात यह है कि एक साथ जन्मे चीते भाई की तरह रहते हैं। साथ में ही शिकार भी करते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के चीता प्रोजेक्ट की खासियत यह है कि यहां देसी और विदेशी चीते ब्रो बन गए हैं। भारत में जन्मे 16 महीने के नर चीते केएनजी-23 और छह महीने पहले बोत्सवाना से लाए गए नर चीते सीसीबी-4 के बीच अटूट दोस्ती हो गई है। दोनों जुड़वा भाई की तरह जंगल में रहने लगे हैं। इनके बीच की बॉन्डिंग देखकर वन विभाग के लोग हैरान रहते हैं।

विदेशी धरती से आए थे कुल 29 जीते

भारत में सालों बाद चीता प्रोजेक्ट को स्थापित करने के लिए कुल 29 चीते विदेशों से लाए गए थे। इनमें सबसे पहले नामीबिया से आठ, दक्षिण अफ्रीका से 12 और बोत्सवाना से नौ चीते लाए गए थे। इसके बाद भारत की धरती पर कुल 49 चीतों का जन्म हुआ। इनमें अभी 32 जीवित हैं। वहीं, विदेश से लाए गए 20 चीते अभी जीवित हैं।

गौरतलब है कि श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क को चीतों की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। इसकी वजह से पर्यटन की गतिविधियां भी वहां तेज हुई है। साथ ही स्थानीय लोगों के रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

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