New AI Tool: हार्ट अटैक आने से 15 साल पहले मिलेगा अलर्ट, सिर्फ 1 बल्ड टेस्ट से AI टूल बता देगा सबकुछ

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 सिर्फ एक बल्ड टेस्ट से वर्षों पहले ही दिल की बीमारी का पता चल सकता है। दरअसल, यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्ग कॉन्ग (HKUMed) के LKS फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के रिसर्चर्स ने एक AI पावर्ड टूल बनाया है, जो एक ही ब्लड टेस्ट से बता देगा कि भविष्य में आपको दिल की बीमारी (कार्डियोवैस्कुलर) होने का कितना खतरा है। इस टूल का नाम कार्डियोमिकस्कोर है। यह टूल एक या दो नहीं बल्कि 6 बड़ी कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का पता लगा सकता है। इसमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर, एट्रियल फिब्रिलेशन, पेरिफेरल आर्टरी डिजीज और वेनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म शामिल है। टूल के नतीजे नेचर कम्युनिकेशंस में पब्लिश किए गए हैं।बीमारी शुरू होने से पहले चल जाएगा पता

इसका मतलब है कि डॉक्टर और मरीज बीमारी होने या शरीर में कोई तकलीफ शुरू होने से पहले ही खतरे को भांप लेना।

HKUMed के डॉक्टरों के मुताबिक(REF.) , कार्डियोमिकस्कोर एक ऐसा एडवांस टेस्ट है, जो दिल की बीमारी के लक्षण जैसे छाती में दर्द या सांस फूलना शुरू होने से 15 साल पहले ही यह बता सकता है कि आपको भविष्य में दिल का दौरा या हार्ट अटैक आ सकता है।

इसका मतलब है कि यह टूल बीमारी शुरू होने से पहले 15 साल पहले ही उसका अंदाजा लगा सकता है।

इस सिस्टम को ऐसे डिजाइन किया गया है कि लक्षण दिखने से पहले ही यह शरीर में मॉलिक्यूलर बदलावों का पता लगा पाए।कैसे काम करता है कार्डियोमिकस्कोर?

रिसर्च टीम ने डीप लर्निंग का इस्तेमाल करके जीनोमिक्स, मेटाबोलोमिक्स और प्रोटिओमिक्स सहित मल्टीओमिक्स डेटा को एक साथ मिलाया है। स्टडी के लिए UK बायोबैंक से पॉपुलेशन डेटा का इस्तेमाल किया गया और ब्लड सैंपल से मापे गए 2,920 सर्कुलेटिंग प्रोटीन और 168 मेटाबोलाइट्स का एनालिसिस किया गया है। ये मॉलिक्यूलर सिग्नल इम्यून सिस्टम, मेटाबॉलिज्म और वैस्कुलर हेल्थ में बदलाव दिखा सकते हैं।

क्या है मकसद?

मैजूदा स्टैंडर्ड हेल्थ चेकअप आमतौर पर उम्र, ब्लड प्रेशर, स्मोकिंग और दूसरे क्लिनिकल इंडिकेटर जैसे फैक्टर के जरिए कार्डियोवैस्कुलर रिस्क के बारे में पता लगाते हैं।

HKUMed में फार्माकोलॉजी और फार्मेसी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर प्रोफेसर झांग किंगपेंग ने कहा कि AI टूल मॉलिक्यूलर सिग्नल को डिकोड करने के लिए डिजाइन किया गया है ताकि डॉक्टर और मरीज रिस्क को पहले पहचान सकें और समय पर लाइफस्टाइल में बदलाव करके बीमारी होने से रोक सके।

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