‘RBI को अपना सोना बेच देना चाहिए’, ₹2.87 लाख करोड़ के डिविडेंड पर क्यों भड़के दिग्गज फंड मैनेजर?

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नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक ( RBI ) ने केंद्र सरकार को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए रेकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड ट्रांसफर करने का फैसला लिया है। केंद्रीय बैंक के इस फैसले पर आर्थिक जगत में एक नई बहस छिड़ गई है। सेबी (SEBI) रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर और कैपिटल माइंड (Capital Mind) के सीईओ दीपक शेनॉय ( Deepak Shenoy ) ने इस डिविडेंड राशि को निराशाजनक बताया है। उन्होंने इस बारे में एक्स पर एक पोस्ट की है, जिसमें कहा है कि रिजर्व बैंक को अपना सोना बेच देना चाहिए। उनकी इस राय पर निवेशकों और अर्थशास्त्रियों के बीच एक बड़ी डिबेट छिड़ गई है।

दीपक शेनॉय ने सोशल मीडिया पर तर्क दिया कि केंद्रीय बैंक का कुल मुनाफा करीब 4 लाख करोड़ रुपये रहा था। इसके बावजूद, आरबीआई ने मुनाफे का एक बहुत बड़ा हिस्सा सरकार को सौंपने के बजाय अपने कंटिजेंट रिस्क बफर (CRB) में रखने का फैसला किया। उन्होंने आरबीआई के इस फैसले को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि एक ऐसा जोखिम बफर जिसका आरबीआई ने कभी इस्तेमाल नहीं किया है है और न ही भविष्य में करना पड़ेगा।

सोना बेचने का सुझाव

शेनॉय ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि आधिकारिक कारण 6.5% को बफर के रूप में बनाए रखना है। उन्होंने पोस्ट में सुझाव दिया है कि आरबीआई को अब अपना सोना (गोल्ड रिजर्व) बेचना चाहिए और अपनी बैलेंस शीट के आकार को कम करना चाहिए, ताकि वे सरकार को और अधिक पैसा लौटा सकें। उन्होंने आगे लिखा, ‘लेकिन ये उम्मीदें, बस उम्मीदें ही रह जाती हैं। हम इससे बेहतर के हकदार हैं।’ रिजर्व बैंक को अपनी कुल बैलेंस शीट का 5.5% से 6.5% हिस्सा कंटिजेंट रिस्क बफर के रूप में बनाए रखना अनिवार्य होता है।

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