ईंधन संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से अपील की है कि वे ‘वर्क फ्रॉम होम’ करें। पेट्रोल व डीजल बचाएं। ये कदम थोड़े समय के लिए मददगार साबित हो सकते हैं, लेकिन आयातित तेल पर भारत की भारी निर्भरता एक पुरानी समस्या है।
नई दिल्लीः अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच जंग फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही है। इसकी वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है और दुनिया के कई हिस्सों में ईंधन संकट पैदा हो गया है। पेट्रोल, डीजल और LPG की ऐसी अभूतपूर्व कमी हो गई है जैसी पहले कभी नहीं देखी गई। इसके मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की है कि वे ‘वर्क फ्रॉम होम’, वर्चुअल मीटिंग करके और पेट्रोल व डीजल का समझदारी से इस्तेमाल करके तेल की बचत करें। ये कदम थोड़े समय के लिए मददगार साबित हो सकते हैं, लेकिन आयातित तेल पर भारत की भारी निर्भरता एक पुरानी समस्या है।
तीन पाइपलाइन जो पार लगा देंगी भारत की नैया
दशकों से, भारत बड़े पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स के जरिए दीर्घकालिक समाधान की तलाश कर रहा है। इनमें से कई आइडिया मसलन ओमान-इंडिया डीपवॉटर पाइपलाइन, इंडिया-श्रीलंका तेल पाइपलाइन और TAPI गैस पाइपलाइन, पर पहली बार 1990 के दशक और 2000 के दशक की शुरुआत में चर्चा हुई थी या उन पर सहमति भी बन गई थी। हालांकि, जियो-पॉलिटिकल, ज्यादा लागत और दूसरी चुनौतियों की वजह से इनमें देरी हो गई।










































