इधर सरकारी आदेश पर पर्यटको के लिए गांगुलपारा बंद, उधर गुपचुप तरीके से लोग कर रहे प्रवेश

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ये लापरवाही पड़ेगी भारी
जान जोखिम में डालकर,झरने की चट्टानों पर चढ़ रहे युवा, ले रहे सेल्फी
विभागीय कर्मचारी अंजान, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
वन विभाग ने पर्यटकों के प्रवेश पर 30 सितंबर तक लगाई गई रोक
फोटो
पदमेश न्यूज़,बालाघाट।बरसात के मौसम में संभावित हादसों को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा गांगुलपारा जलप्रपात को पर्यटकों के लिए बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद मौके पर स्थिति बिल्कुल अलग नजर आ रही है। प्रतिबंध के बावजूद बड़ी संख्या में लोग चोरी-छिपे जलप्रपात क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं और सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि कई युवा अपनी जान जोखिम में डालकर फिसलन भरी चट्टानों पर चढ़ रहे हैं। कोई झरने के बिल्कुल किनारे खड़े होकर सेल्फी ले रहा है तो कोई ऊंची चट्टानों पर पहुंचकर वीडियो बनाने में व्यस्त है।जहा पर पर जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।बावजूद इसके भी जिम्मेदार बेखबर है।

30 सितंबर तक लगाई गई है प्रवेश पर रोक
यदि आप भी गांगुलपारा जलाशय घूमने का मन बना रहे है तो खबर आपके लिए है।क्यो की जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर पर बसे गांगुलपारा जलाशय के वॉटरफॉल (झरना ) देखने के लिए आ रहे पर्यटकों के प्रवेश पर 30 सितंबर तक के लिए रोक लगा दी गई है। विभाग ने स्पष्ठ किया है कि पर्यटक छुट्टियों के लिए इस क्षेत्र में न आएं।जहा नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाने की भी चेतावनी जारी की गई है।बावजूद इसके भी यहां लोग अवैध रूप से प्रवेश कर रहे है।जो नियमो का उल्लंघन कर अपनी जान जोखिम में डालकर झरने में नहा रहे है, तो वही फिसलन भरी चट्टानों में चढ़कर झरने के साथ सेल्फी लेते नजर आ रहे है।

अवैध रूप से युवा कर रहे प्रवेश
आपको बताए कि वन विभाग द्वारा जारी किया गया यह आदेश पर्यटकों के लिए मायूसी भरा आदेश है।जिसके चलते गांगुलपारा पहुचने वाले पर्यटकों को अब प्राकृतिक सौंदर्य के साथ साथ झरने के भी दर्शन नही हो पा रहे है।बताया जा रहा है कि मॉनसून के दौरान पर्यटक भी बड़ी संख्या में इस प्राकृतिक क्षेत्र में घूमने और झरने का आनंद लेने आते हैं।ऐसे में कई बार यह हादसे हो जाते है।इसलिए 30 सितंबर तक इस क्षेत्र में प्रवेश पर वन विभाग द्वारा रोक लगाई गई है।उधर इस रोक के बावजूद भी युवा इस प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश कर पार्टी करते नजर आ रहे है जिसका एक नजारा आए दिनों की तरह रविवार को गांगुलपारा झरने के समीप देखने को मिला।जहा कुछ युवा झरने की चट्टानों में चढ़कर मौज मस्ती करते हुए नजर आए।

हादसे की रहा देख रहे कर्मचारी
बताया गया कि गांगुलपारा क्षेत्र में बरसात के दौरान पानी का बहाव अचानक तेज हो जाता है। ऐसे में चट्टानों पर फिसलन बढ़ जाती है और कई बार बिना किसी चेतावनी के जलस्तर बढ़ जाता है। इसके बावजूद पर्यटक अपनी जान की परवाह किए बिना खतरनाक स्थानों तक पहुंच रहे हैं।हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर प्रशासन ने पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा रखी है, वहीं दूसरी ओर मौके पर सुरक्षा व्यवस्था भी लगाई गई है।लेकिन यहां न तो पर्याप्त निगरानी हो रही है और न ही विभागीय कर्मचारियों द्वारा कोई कार्यवाही की जा रही है। इसी का फायदा उठाकर लोग आसानी से प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। पूर्व में भी इस पर्यटन स्थल पर सेल्फी लेने और लापरवाही के कारण लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद लोग सबक लेने को तैयार नहीं हैं।विभाग को चाहिए कि गांगुलपारा जलप्रपात पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जाए, पुलिस एवं वन अमले की नियमित तैनाती हो, प्रवेश मार्गों पर कड़ी निगरानी रखी जाए वही प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से पहले स्थिति पर नियंत्रण किया जा सके।

असामाजिक तत्वों का रहता है जमावड़ा,बिखरी नजर आती है गंदगी
प्राकृति की गोद में बसे इस इको पर्यटन क्षेत्र गांगुलपारा में असामाजिक तत्व इधर से उधर घूमते नजर आते हैं। जिन पर अब तक लगाम लगाने में प्रशासन नाकाम रहा है ।वहीं जगह-जगह बैचलर पार्टी होना, युवाओं द्वारा शोर मचाना और एक दूसरे को अपशब्दों का प्रयोग कर आवाज लगाना यहां आम बात हो गई है। किसी की रोक ना होने के चलते अक्सर झरने के पास युवाओं को बैचलर पार्टी मनाते देखा जा सकता है। वहीं किसी भी प्रकार की कोई मनाही न होने के चलते लोग धूम्रपान करते नजर आते हैं जबकि इस क्षेत्र में धूम्रपान करना वर्जित किया गया है।जिस पर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का अब तक कोई ध्यान नहीं है वहीं जगह-जगह पॉलिथीन व कचरा बिखरा होना यह आम बात हो गई है।

जान जोखिम में डालकर युवा ले रहे सेल्फी
घने जंगल ऊंचे पहाड़ों और प्रकृति की गोद में बसे इको पर्यटन स्थल गांगुलपारा का झरना लोगों को स्वतः ही अपनी ओर खींच लाता है ।यहां आने वाले लोग अक्सर झरने के समीप बैठकर पार्टी मनाते नजर आते हैं। वही अक्सर कई युवा चट्टानों में चढ़कर झरने के पानी में नहाते और वह सेल्फी लेते दिखाई देते हैं जिन्हें रोकने टोकने वाला तक भी कोई नहीं है। किसी भी प्रकार की बंदिश ना होने के चलते युवा बे रोक-टोक चट्टानों में चढ़कर झरने का लुत्फ़ उठाते है। और अपनी जान को जोखिम में डालकर सेल्फी लेते नजर आते हैं। हालांकि विभाग द्वारा झरने के समीप सुरक्षा के लहजे से वन्य कर्मियों की ड्यूटी लगाए जाने की बात कही जा रही है लेकिन जब भी निरीक्षण करने पदमेश की टीम पहुंची है तो झरने के समीप एक भी सुरक्षाकर्मी नजर नहीं आता और यहां का नजारा किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता देता दिखाई देता है। झरने के समीप क्या गतिविधियां चल रही है?, जंगल में कौन धूम्रपान कर रहा है ?,कौन शराब पी रहा है?, जगह-जगह पॉलिथीन कौन फेक रहा है या झरने के ऊपर चढ़कर सेल्फी कौन ले रहा है इस पर कर्मचारियों का कोई ध्यान नहीं है।

वन्यप्राणियो का भी बना रहता है खतरा
विभागीय जानकारी के अनुसार टाइगर रिज़र्व से सटे घने जंगल होने के कारण यहाँ भी हिंसक प्राणियों की मौजूदगी बनी रहती है।वर्षा के मौसम में वन्य जंतुओं का प्रणयकाल होता है। इस दौरान वन्य जीव जंतु बहुत अधिक हिंसक हो जाते हैं। इस दौरान वे किसी भी तरह की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं करते। वाहनों का आना-जाना और सैलानियों की उपस्थिति भी उनके प्रणय काल में बाधा बन सकती है।इससे वन्य जीवन का इकोसिस्टम प्रभावित हो सकता है। इसका सीधा असर वन्य प्राणियों की संख्या पर पड़ता है। यही कारण है कि पूरे वर्षा ऋतु में यहाँ आने जाने पर रोक लगा दी जाती है।

अधिकारी से नही हो सका संपर्क-
इस पूरे मामले को लेकर जब हमने बालाघाट डीएफओ नित्यानंद एल से संपर्क करने का प्रयास किया तो रविवार होने के चलते कार्यालय में उनसे संपर्क नहीं हो सका, वहीं हमने उनके दूरभाष क्रमांक 9424790200 पर भी संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन मोबाइल नंबर पर भी उनसे संपर्क नहीं हो सका।

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