कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने लोकसभा में परीक्षा प्रश्नपत्र निरोधक कानून को मोदी सरकार की ‘विफलता का स्मारक’ करार दिया। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को सदन में इसका जवाब देना चाहिए कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था। इस दौरान उन्होंने गीतकार नीरज का गीत ‘कारवां गुजर गया,गुबार देखते रहे’ सुनाकर सरकार पर तंज भी कसा।
लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। साथ ही दावा किया कि 2024 में लाया गया मूल कानून भी पेपर लीक रोकने में नाकाम रहा था और नया प्रस्तावित कानून भी अपने उद्देश्य में सफल नहीं होगा।
‘सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर गंभीर नहीं’
उन्होंने कहा कि मंत्री (जितेंद्र सिंह) के वक्तव्य और विधेयक के प्रावधानों से स्पष्ट है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर गंभीर नहीं है और यह केवल दिखावे का विधेयक है।
गोगोई ने कहा कि 2024 में जब इसी तरह का विधेयक लाया गया था तब सरकार ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए दावा किया था कि पेपर लीक नहीं होगा, लेकिन उसी वर्ष नीट-यूजी पेपर लीक मामले में 45 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें से अधिकतर को जमानत मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि मामले के कथित मास्टरमाइंड को भी जमानत मिल गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब 2024 में पेपर लीक का मामला सामने आया था तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इससे इनकार किया था और इस बार भी उनका रवैया वैसा ही रहा।
‘संसद परिसर में धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर भी सवाल’
इस दौरान कांग्रेस सांसद गोगोई ने संसद परिसर में भाजपा के कुछ सदस्यों द्वारा धर्मेंद्र प्रधान का स्वागत किए जाने को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि इस सरकार को शर्म आनी चाहिए कि संसद में पूर्व मंत्री का ऐसा स्वागत किया गया मानो वह पाकिस्तान से जंग लड़कर आए हों।
‘पीएम मोदी धांधली पर चर्चा के बजाय पीएम का फोकस इस्टाग्राम पर’
उन्होंने आरोप लगाया कि कैबिनेट की बैठक में पेपर लीक माफिया, कोचिंग माफिया और परीक्षा प्रणाली में धांधली पर चर्चा करने के बजाय प्रधानमंत्री ’इंस्टाग्राम’ पर ध्यान देने की बात करते हैं।
‘राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लेकर पूछा सवाल’
इस दौरान गोगोई ने पीएम मोदी द्वारा गठित हाई टास्क फोर्स के गठन पर भी सवाल उठाए। गोगोई ने उच्चाधिकार समिति का उल्लेख करते हुए पूछा कि सरकार यह बताए कि उसकी ओर से गठित राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का क्या हुआ। गोगोई ने दावा किया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के 47 लोगों को हटाए जाने की बात कही गई, जबकि संस्था में स्वीकृत पदों की संख्या 34 है।उन्होंने सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण देने की मांग की।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब एनटीए के महानिदेशक को बदल दिया गया तो चेयरमैन को क्यों बरकरार रखा गया।
‘एनटीए के चेयरमैन एक विशेष संगठन से जुड़े’
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि एनटीए के चेयरमैन एक विशेष संगठन से जुड़े हैं तथा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में उनके पूर्व कार्यकाल के दौरान भी अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
उन्होंने कहा कि भाजपा से संबंधित एक वैचारिक संगठन के लिए शिक्षा विभाग महत्वपूर्ण है और विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां इसी सोच के तहत की जा रही हैं।
‘केवल जुर्माने की राशि बढ़ाने से शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा’
गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार के लिए शिक्षा का उद्देश्य लोगों को एक विशेष विचारधारा से जोड़ना और उसके पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित करना नहीं होना चाहिए। वहीं, गोगोई ने संशोधन विधेयक के प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा कि केवल जुर्माने की राशि बढ़ाने से शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा।
उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं को अपने भविष्य की चिंता है और इसी कारण वे सड़कों पर उतरे। उन्होंने 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि वह उन युवाओं को नमन करते हैं जिन्होंने सबको यह याद दिलाया कि लोकतंत्र में सवाल पूछना नागरिकों का मौलिक कर्तव्य है।
सरकार और अमित शाह को देना होगा जवाब
इस आंदोलन में कुछ को लाठियों से पीटा गया, कुछ के सिर फोड़ दिए गए, लेकिन वे डगमगाए नहीं। इस आंदोलन में जहां हमने मानवता देखी, वहीं दूसरी ओर युवाओं पर किया गया क्रूर लाठीचार्ज भी देखा। हम यह नहीं भूल सकते कि एक पुलिसकर्मी ने एक लड़की को थप्पड़ मारा, एक लड़की के गुप्तांगों पर लाठी मारी। युवाओं पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया। हम इस पर जवाब मांगते हैं कि लाठीचार्ज, पेलेट गन और आंसू गैस के गोले दागने का आदेश किसने दिया? सरकार और गृह मंत्री अमित शाह को इसका जवाब देना होगा।










































