बॉलीवुड के बैकग्राउंड डांसर्स की बदहाली, थिरकती दुनिया में बेरोजगारी का शोर, बर्तन मांजने तक को मजबूर

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जैसे ही उनके नाम की घोषणा हुई, सीनियर बैकग्राउंड डांसर अनीता की आंखें छलक उठीं। जीवन की पूर्व संध्या में उनके हाथों में अपने घर की चाबी थी। भावुक होकर उन्होंने जाने-माने कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा और शबीना खान को गले लगा लिया। मौका ही कुछ ऐसा था। बैकग्राउंड डांसर्स के कल्याण के लिए काम करने वाली संस्था ‘नृत्य सेवा’ की ओर से आयोजित नृत्य सेवा बॉक्स क्रिकेट लीग में स्पेशल लकी ड्रॉ के जरिए अनीता को एक घर मिला। वर्षों तक फिल्मों में बड़े सितारों के पीछे थिरकने वाली अनीता के सम्मान में पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा और सभी ने उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया। इस आयोजन में शबीना खान, रेमो डिसूजा, बोस्को मार्टिस, टेरेंस लुईस, सीजर गोंसाल्विस और संजय शेट्टी समेत कई नामचीन कोरियोग्राफर मौजूद रहे। राज सुरानी, खुशबू गुप्ता और महेश पटेल की पहल ने इस कार्यक्रम को एक यादगार और भावुक पल में बदल दिया।

अनीता की यह खुशी सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उन हजारों बैकग्राउंड डांसर्स के संघर्ष की कहानी भी है, जो फिल्मों के गानों में जान डालते हैं, लेकिन खुद अक्सर आर्थिक असुरक्षा से जूझते हैं। ‘नृत्य सेवा’ के संस्थापक, पूर्व बैकग्राउंड डांसर और डांस कोऑर्डिनेटर राज सुरानी कहते हैं, ‘मैंने डांसर्स की बदहाली करीब से देखी है। इंडस्ट्री को हमेशा युवा और फिट डांसर्स चाहिए होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ काम घटता जाता है और कई कलाकारों के लिए रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता है। जब महीने में सिर्फ पांच-दस दिन ही काम मिले, तो बाकी दिनों का गुजारा कितना कठिन होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उम्रदराज महिला डांसर्स आज बहुत ज्यादा मुश्किल में हैं। आज इन कलाकारों को इंडस्ट्री के सहयोग और सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत है।’ आखिर क्या हैं वे मुश्किलें, जिनसे पर्दे पर सितारों की चमक बढ़ाने वाले ये कलाकार पर्दे के पीछे जूझ रहे हैं? आइए जानते हैं बैकग्राउंड डांसर्स के संघर्ष, चुनौतियों और उनकी अनकही हकीकत।

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